UPSC DAILY CURRENT IN HINDI 16-10-2018

[1]

केंद्रीय सूचना आयोग के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

  1. हाल ही में केंद्रीय सूचना आयोग के 13वें सम्मेलन का आयोजन नई दिल्ली में किया गया।
  2. आयोग के निर्णय अंतिम और बाध्यकारी होते हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2
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उत्तर : (c )
व्याख्या :

  • हाल ही में भारत के राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद ने नई दिल्ली में केंद्रीय सूचना आयोग के 13वें सम्मेलन का उद्घाटन किया। सूचना अधिकार अधिनयम, 2005 के अंतर्गत केंद्रीय सूचना आयोग का गठन दिनांक 12 अक्तूबर, 2005 को किया गया। आयोग की अधिकारिता सभी केंद्रीय लोक प्राधिकारियों पर है। अतः कथन 1 सही है।
  • केंद्रीय सूचना आयोग की कुछ शक्तियाँ और कार्य हैं, जो सूचना अधिकार अधिनियम की धाराओं 18, 19, 20 और 25 में उल्लिखित हैं। इसमें वार्षिक प्रतिवेदन तैयार करने के साथ-साथ मुख्य रूप से सूचना हेतु आवेदन दाखिल करने में असमर्थता आदि तथ्यों पर आधारित शिकायत को प्राप्त करना और उनकी जाँच करना; सूचना प्रदान करने के लिये द्वितीय अपील का न्यायनिर्णयन; अभिलेखों के रख-रखाव के लिये निर्देश, स्वप्रेरणा से प्रकटन, आर.टी.आई. दाखिल करने की असमर्थता पर शिकायतों की प्राप्ति एवं जाँच आदि; अर्थदण्ड का अधिरोपण और अनुश्रवण तथा प्रतिवेदन आदि शामिल हैं। आयोग के निर्णय अंतिम और बाध्यकारी होते हैं। अतः कथन 2 सही है।
[2]

मसौदा राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स नीति 2018 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

  1. हाल ही में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स नीति 2018 का मसौदा जारी किया गया।
  2. इस मसौदा नीति के मुताबिक वित्त मंत्रालय देश में सॉफ्टवेयर उद्योग के विस्तार को प्रोत्साहन प्रदान करने के लिये संबंधित मंत्रालयों/विभागों के साथ समन्वय स्थापित करेगा।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2
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उत्तर : (a)
व्याख्या :

  • हाल ही में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स नीति 2018 (National Electronics Policy or NPE-2018) का मसौदा जारी किया गया। उल्लेखनीय है कि पहली राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स नीति 2012 में जारी की गई थी, इसने देश में विनिर्माण इकाइयों की स्थापना करने वाली कंपनियों को प्रोत्साहन प्रदान किया था। अतः कथन 1 सही है।
  • मसौदा नीति के मुताबिक, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय देश में इलेक्ट्रॉनिक्स हार्डवेयर विनिर्माण उद्योग के विस्तार को प्रोत्साहन प्रदान करने के लिये संबंधित मंत्रालयों/विभागों के साथ समन्वय स्थापित करेगा। यह नीति मौज़ूदा इकाइयों के विस्तार और नई इकाइयों की स्थापना के लिये संशोधित विशेष प्रोत्साहन पैकेज योजना (Modified Special Incentive Package Scheme- M-SIPS) को ऐसी योजनाओं के माध्यम से हटाने का प्रावधान करती है जिन्हें लागू करना आसान है, जैसे- सब्सिडी तथा क्रेडिट डिफ़ॉल्ट गारंटी आदि। अतः कथन 2 सही नहीं है।
[3]

जीनोम एशिया 100k परियोजना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

  1. इस योजना के लक्ष्यों में जीनोम को अनुक्रमित करना और मानव स्वास्थ्य तथा बीमारी को एक शोध पहल के रूप में जोड़ना शामिल है।
  2. विज्ञान और प्रौद्योगिक मंत्रालय तथा आईआईटी खड़गपुर इस परियोजना के साथ निकटता से जुड़े होंगे।
  3. 50,000 भारतीयों सहित 1 लाख एशियाई लोगों के पूरे जीनोमों को अनुक्रमित करने के लिये भारतीय वैज्ञानिकों और कंपनियों का एक समूह इस परियोजना में शामिल है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

A) केवल 1 और 2
B) केवल 1 और 3
C) केवल 2 और 3
D) 1, 2 और 3
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उत्तर : (b)
व्याख्या :

  • इस योजना के लक्ष्यों में जीनोम को अनुक्रमित करना और मानव स्वास्थ्य तथा बीमारी को एक शोध पहल के रूप में जोड़ना एवं इस प्रक्रिया को बड़े पैमाने पर सुनिश्चित करना शामिल है, ताकि इसका सार्वजनिक स्वास्थ्य पर प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ सके। अतः कथन 1 सही है।
  • स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और जैव प्रौद्योगिकी विभाग इस परियोजना के साथ निकटता से जुड़े होंगे। यह विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार सलाहकार परिषद (STIAC) की पहली बैठक में लिये गए महत्त्वपूर्ण निर्णयों में से एक था। यह परिषद परियोजनाओं और मिशनों पर काम करने के लिये कई मंत्रालयों के बीच एक समन्वयक के रूप में कार्य करती है और महीने में एक बार इसकी बैठक निर्धारित की गई है। अतः कथन 2 सही नहीं है।
  • 50,000 भारतीयों सहित 1 लाख एशियाई लोगों के पूरे जीनोमों को अनुक्रमित करने के लिये भारतीय वैज्ञानिकों और कंपनियों का एक समूह जीनोम एशिया 100k परियोजना में शामिल है, जिसे नान्यांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (NTU) द्वारा संचालित किया जा रहा है। यूनाइटेड किंगडम, चीन, जापान और ऑस्ट्रेलिया की परियोजनाओं के समान भारत इसका उपयोग स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के साथ-साथ व्यक्ति-विशेष आधारित दवाओं का निर्माण करने की वैश्विक प्रवृत्ति की बराबरी के लिये जीनोमों को अनुक्रमित करने की योजना बना रहा है। अतः कथन 3 सही है।
[4]

हाल ही में भारत के किस राज्य ने संयुक्त राष्ट्र समर्थित फ्यूचर पॉलिसी अवार्ड प्राप्त किया?

A) आंध्र प्रदेश
B) गोवा
C) मेघालय
D) सिक्किम
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उत्तर : (d)
व्याख्या :

  • हाल ही में भारत के पहले पूर्ण जैविक राज्य सिक्किम ने संयुक्त राष्ट्र समर्थित फ्यूचर पॉलिसी अवार्ड जीत लिया। पुरस्कार आयोजकों के अनुसार, राज्य की नीतियों से जहाँ 66,000 किसानों को फायदा हुआ है, वहीं पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ ही अन्य देशों के लिये उदाहरण भी प्रस्तुत किया है। उल्लेखनीय है कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों को खत्म करने के साथ ही उनके स्थान पर स्थायी विकल्पों को प्रतिस्थापित करने पर सिक्किम को 2016 में देश का पहला जैविक राज्य घोषित किया गया था।
[5]

मी टू आंदोलन (#Me Too) अभियान के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

  1. मी टू आंदोलन (#Me Too) यौन उत्पीड़न और हमले के खिलाफ एक अंतर्राष्ट्रीय आंदोलन है।
  2. इसके माध्यम से महिलाएँ अपने खिलाफ हुए उत्पीड़न को तेज़ी से सोशल मीडिया पर शेयर भी कर रही हैं।
  3. हाल ही में भारत सरकार ने मी टू अभियान को बढ़ते देख और मामले की गंभीरता पर जाँच के लिये एक पैनल गठित करने का फैसला लिया है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

A) केवल 1 और 2
B) केवल 1 और 3
C) केवल 2 और 3
D) 1, 2 और 3
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उत्तर : (d)
व्याख्या :

  • मी टू आंदोलन (#Me Too) यौन उत्पीड़न और हमले के खिलाफ एक अंतर्राष्ट्रीय आंदोलन है। अक्तूबर 2017 में हॉलीवुड के बड़े निर्माताओं में शामिल हार्वी वाइनस्टीन पर कई महिलाओं ने यौन उत्पीड़न और बलात्कार के आरोप लगाए थे तथा वाइनस्टीन पर आरोप लगने के बाद दुनिया भर में #Me Too आंदोलन की शुरुआत हुई थी जिसमें यौन उत्पीड़न के ख़िलाफ़ प्रदर्शन भी हुए थे। अतः कथन 1 सही है।
  • इसके माध्यम से महिलाएँ अपने खिलाफ हुए उत्पीड़न को तेज़ी से सोशल मीडिया पर शेयर भी कर रही हैं। यह अभियान भारत में इतनी तेज़ी से फ़ैल रहा है कि नेता से लेकर अभिनेता तक कोई भी वर्ग ऐसा नहीं है जो इसके दायरे में नहीं आया हो। अतः कथन 2 सही है।
  • हाल ही में भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने मी टू अभियान को बढ़ते देख और मामले की गंभीरता पर जाँच के लिये जाने-माने कानूनविदों का पैनल गठित करने का फैसला लिया है। सरकार एक “तथ्य-खोज आयोग” नियुक्त करेगी जो सार्वजनिक सुनवाई करेगा। पीड़ित महिलाएँ पैनल के सामने गवाही भी दे सकती हैं। इसके बाद, पैनल कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की व्यापक प्रकृति के कारणों और परिणामों की पहचान करेगा जो कानून में बदलाव का कारण बन सकता है। अतः कथन 3 सही है।

 

वैश्विक कौशल पार्क

Global Skill Park

हाल ही में एशियाई विकास बैंक (Asian Development Bank- ADB) और भारत सरकार ने मध्‍य प्रदेश में एक वैश्विक कौशल पार्क (Global Skill Park- GSP) की स्‍थापना के लिये 150 मिलियन डॉलर के एक ऋण समझौते पर हस्‍ताक्षर किये।

  • यह भारत का पहला बहु-कौशल (Multi-Skill) पार्क होगा।
  • इसका उद्देश्‍य राज्‍य में तकनीकी और व्‍यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण प्रणाली की गुणवत्‍ता को बेहतर करना और अधिक कुशल श्रमबल सृजित करना है।
  • नया GSP कैंपस भोपाल में स्‍थापित किया जाएगा, जिसमें प्रमुख उन्‍नत प्रशिक्षण संस्‍थान होंगे।
  • यहाँ व्‍यावसायिक कौशल प्रशिक्षण केंद्र और उन्‍नत कृषि प्रशिक्षण केंद्र के साथ-साथ ऐसी अन्‍य सहायक सेवाओं से जुड़े केंद्र भी होंगे, जिनमें उद्यमिता, प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण और कौशल संबंधी अनुसंधान पर फोकस किया जाएगा।
  • इस कैंपस से लगभग बीस हज़ार प्रशिक्षु एवं प्रशिक्षक लाभान्वित होंगे।
राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य पुनर्वास संस्थान

NIMHR

हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मध्य प्रदेश के सिहोर ज़िले में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य पुनर्वास संस्थान (National Mental Health Rehabilitation Institute- NIMHR) खोले जाने की मंज़ूरी दे दी है। उल्लेखनीय है पहले यह संस्थान भोपाल में खोला जाना था।

  • सिहोर में बनने वाला राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य पुनर्वास संस्थान देश में अपनी तरह का पहला संस्थान होगा।
  • यह संस्‍था निशक्‍त जन सशक्तीकरण विभाग के अंतर्गत एक सोसाइटी के रूप में सोसाइटीज़ रजिस्‍ट्रेशन एक्‍ट, 1860 के तहत स्‍थापित की जाएगी।
  • संस्थान का मुख्‍य उद्देश्‍य मानसिक रूप से बीमार व्‍यक्तियों के पुर्नवास की व्‍यवस्‍था करना, मानसिक स्‍वास्‍थ पुर्नवास के क्षेत्र में क्षमता विकास तथा मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य पुर्नवास के लिये नीति बनाना और अनुसंधान को बढ़ावा देना है।
  • यह संस्थान मानसिक स्वास्थ्य पुनर्वास के क्षेत्र में मानव संसाधन और अनुसंधान के लिये उत्कृष्टता और क्षमता विकास केंद्र के रूप में काम करेगा और मानसिक बीमारियों से ग्रस्त लोगों के प्रभावी पुनर्वास के लिये बेहतर मॉडल सुझाएगा।
  • संस्‍थान मानसिक रोगियों के लिये सभी तरह की पुर्नवास सेवाएँ उपलब्‍ध कराने के साथ‍ही स्‍नात्‍कोत्‍तर और एम.फिल. डिग्री तक की शिक्षा की भी व्‍यवस्‍था करेगा।
इंडिया फॉर ह्यूमैनिटी

Humanity

हाल ही में ‘इंडिया फॉर ह्यूमैनिटी’ (India for Humanity) की औपचारिक रूप से शुरुआत की गई।

  • विदेश मामलों के मंत्रालय ने मानवता के प्रति गांधी जी की सेवाओं को सम्मानित करने के उद्देश्य से अगले एक साल तक चलने वाले महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती समारोह के हिस्से के रूप में इस कार्यक्रम की शुरुआत की है।
  • महात्मा गांधी की करुणा, देखभाल और मानवता की सेवा के आदि को रेखांकित करते हुए, ‘मानवता के लिये भारत या India For Humanity’ कार्यक्रम के तहत दुनिया भर में एक वर्ष तक चलने वाले कृत्रिम अंग फिटनेस शिविर लगाए जाएंगे, इसके लिये मंत्रालय प्रसिद्ध चैरिटेबल ट्रस्ट ‘भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति’ के साथ मिलकर काम कर रहा है।
  • 1975 में स्थापित यह समिति अपने ट्रेडमार्क अंग “जयपुर फुट” के लिये सुप्रसिद्ध है, भगवान् महावीर विकलांग सहायता समिति कृत्रिम अंगों के फिटनेस के लिये दुनिया के सबसे बड़े संगठनों में से एक है और अब तक 1.73 मिलियन से अधिक लोगों को सेवा प्रदान कर चुकी है।
  • इस अंग प्रत्यर्पण शिविर  को पूरी तरह से विदेश मंत्रालय द्वारा प्रायोजित किया जाएगा।

 

दिल्ली वायु प्रदूषण : ग्रेडेड रेस्पांस एक्शन प्लान

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र-3: प्रौद्योगिकी, आर्थिक विकास, जैव विविधता, पर्यावरण, सुरक्षा तथा आपदा प्रबंधन। 
(खंड-14 : संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।)

Delhi Air Pollution

चर्चा में क्यों?

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने राजधानी में ख़राब स्थिति की ओर रुख कर रहे वायु प्रदूषण का मुकाबला करने के लिये आपातकालीन कार्य योजना (emergency action plan) लागू की है। इसके तहत वायु गुणवत्ता खराब होने पर तत्काल सख्त कदम उठाए जाएंगे।

प्रमुख बिंदु 

  • ग्रेडेड रेस्पांस एक्शन प्लान (Graded Response Action Plan-GRP) नामक इस आपातकालीन योजना के तहत शहर की वायु गुणवत्ता के आधार पर कड़े कदम उठाए जाते हैं।
  • इस कार्य योजना के अंतर्गत मध्यम से खराब श्रेणी में वायु गुणवत्ता होने पर कचरा जलाने से रोक दिया जाएगा और ईंट भट्ठे, उद्योगों में प्रदूषण नियंत्रण के मानक लागू किये जाएंगे।
  • वायु गुणवत्ता बहुत खराब होने पर डीज़ल चालित जेनरेटर पर रोक लगा दी जाएगी। सड़कों की सफाई होगी और पानी का छिड़काव किया जाएगा।
  • पार्किंग फीस में तीन से चार गुना तक इजाफा किया जा सकता है। इसके अलावा मेट्रो और बसों के फेरे बढ़ाए जाएंगे। हवा इससे ज़्यादा जहरीली होने पर ट्रकों का दिल्ली में प्रवेश रोकने, निर्माण कार्य पर रोक लगाने, स्कूलों में छुट्टी जैसे कदम उठाए जाएंगे।
  • वर्तमान में वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी (poor category) में है लेकिन अधिकारियों ने बताया है कि यह अगले कुछ दिनों में ‘बहुत ख़राब’ (very poor) की श्रेणी तक पहुँच जाएगी।
  • प्रदूषण पैदा करने वाले कारकों पर रोकथाम के लिये केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने GRAP के अलावा दिल्ली-एनसीआर में 41 टीमों की तैनाती की है।
  • इन टीमों ने 11 अक्तूबर तक 96 जगहों का निरीक्षण किया, जबकि 554 लोगों का चालान भी किया गया है। आने वाले समय में इसमें और तेज़ी लाई जाएगी।
  • निरीक्षण के दौरान नासा के सेटेलाइट द्वारा प्राप्त चित्रों में हरियाणा तथा पंजाब के कुछ जगहों पर पराली जलाने की गतिविधियाँ देखी गई हैं।
  • नासा ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर कहा है कि पंजाब और हरियाणा में फसल के अवशेषों को जलाने की गतिविधियों में अमृतसर, अंबाला, करनाल, सिरसा और हिसार के आस पास के क्षेत्रों में करीब 10 दिनों से उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
  • उल्लेखनीय है कि पंजाब और हरियाणा में अक्तूबर और नवंबर के दौरान हर साल धान की पराली जलाने तथा अप्रैल में गेहूँ का भूसा दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण के प्रमुख योगदानकर्त्ता हैं।

 

तितली, फैलिन और हुदहुद अक्तूबर में ही क्यों?

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र-3: प्रौद्योगिकी, आर्थिक विकास, जैव विविधता, पर्यावरण, सुरक्षा तथा आपदा प्रबंधन। 
(खंड-14 : आपदा और आपदा प्रबंधन।)

Cyclones

संदर्भ

हाल ही में ओडिशा तथा आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्रों से तितली नामक तूफान ने दस्तक दी। पिछले पाँच सालों में इन्हीं तटीय क्षेत्रों से टकराने वाला यह तीसरा प्रमुख तूफान था। ध्यान देने योग्य बात यह है कि इन सभी तूफानों ने अक्तूबर के महीने में ही दस्तक दी। निश्चित समयावधि पर तूफानों के दस्तक देने के पीछे कुछ खास भौतिक कारण हैं।

मौसम और बारंबारता

  • IIT भुवनेश्वर के पृथ्वी, महासागर एवं जलवायु विज्ञान विद्यापीठ के वैज्ञानिकों ने बंगाल की खाड़ी के अवलोकनों का हवाला देते हुए जिक्र किया कि “इस क्षेत्र में तूफान बारंबार आते रहे हैं। आखिर इन तूफानों की बारंबारता की वज़ह क्या है?”
  • उत्तर-पश्चिम प्रशांत टाइफून के लिये दुनिया के सबसे सक्रिय बेसिनों में से एक है। नज़दीक होने की वज़ह से फिलीपींस, चीन और दक्षिण एशियाई क्षेत्रों में प्रमुख तूफानों के अवशेष दस्तक देते हैं।
  • इन स्थानों की वज़ह से कम दबाव की स्थिति उत्पन्न होती है जो चक्रवात में विकसित हो जाती है।

 

TITLI

 

  • तितली, फैलिन (2013) और हुदहुद (2014) जैसे चक्रवात आमतौर पर अक्तूबर में दस्तक देते हैं क्योंकि इस दौरान विंड शियर (wind shear) कम होता है।
  • विंड शियर अलग-अलग सतहों पर हवा की गति तथा उसकी दिशा के बीच का अंतर होता है।
  • जब न्यून विंड शियर 26 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान वाली समुद्री सतह के साथ संयुक्त होता है, तब चक्रवात की संभावना बढ़ जाती है।
  • मानसून के दौरान चक्रवात बहुत दुर्लभ होते हैं क्योंकि विंड शियर बहुत ज़्यादा होता है।

भविष्यवाणी करना मुश्किल

  • वैज्ञानिकों के अनुसार, बजटीय और मौसम संबंधी कारकों की वजह से पूर्वानुमान लगाना मुश्किल हो जाता है।
  • अटलांटिक बेसिन में अमेरिका ने ऐसे विमानों को नियुक्त किया है जो नमी के स्तर का अध्ययन करने तथा चक्रवात पार्श्वचित्र पर विभिन्न आँकड़े एकत्र करने के लिये सीधे बादलों के बीच उड़ान भरते हैं।
  • समुद्र में विकसित होने वाले चक्रवातों के अध्ययन हेतु भारतीय वैज्ञानिकों को सेटेलाइट द्वारा ली गई तस्वीरों पर निर्भर रहना पड़ता है। ये तस्वीरें नमी की मात्रा तथा तीव्रता पर बहुत कम आँकड़े प्रदान करती हैं।
  • भारत तूफानों के पूर्वानुमान में प्रयुक्त होने वाले मॉडल अमेरिका और यूरोप से प्राप्त करता है लेकिन इन मॉडलों को नियमित रूप से अपग्रेड करने हेतु संसाधनों की कमी की वज़ह से सटीक पूर्वानुमान नहीं प्राप्त कर पाता है।

प्रभावित क्षेत्र से निकासी

  • शोधकर्त्ता निकासी प्रक्रिया को हॉरिजॉन्टल, वर्टीकल और प्रभावित-क्षेत्र में ही आश्रय के रूप में वर्गीकृत करते हैं।
  • हॉरिजॉन्टल निकासी प्रक्रिया में, प्रभावित क्षेत्र को पूरी तरह से खाली करा लिया जाता है। लेकिन भारत में सड़कों तथा यातायात की खराब हालत की वज़ह से शायद ही कभी इस प्रक्रिया का पालन किया जाता है।
  • वर्टीकल निकासी प्रक्रिया में, लोगों को प्रभावित क्षेत्र के भीतर ही विशेष रूप से बनाई गई इमारतों में ले जाया जाता है। तितली चक्रवात के दौरान काफी हद तक इस रणनीति का पालन किया गया था।

Chakarwat

  • प्रभावित-क्षेत्र में ही आश्रय, इस निकासी प्रक्रिया में मौजूदा घरों और सामुदायिक भवनों की किलेबंदी करना शामिल हैं। इस प्रक्रिया में भी वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता होती है।

क्या भारत में निकासी प्रभावी होती है?

सरकार के मुताबिक तितली चक्रवात के दौरान करीब 3 लाख लोगों को सफलतापूर्वक निकाला गया था। हालाँकि बिट्स पिलानी के एक शोधकर्त्ता के अनुसार, आपदा प्रबंधन की सफलता के रूप में व्यापकता से इस्तेमाल किये गए मानक, जैसे कि ‘कुल निकासी’, भ्रामक हैं। तितली, फैलिन और हुदहुद चक्रवातों के दौरान ज़्यादातर ज़िंदगियाँ इसलिये बच गईं क्योंकि 1999 के सुपरसाइक्लोनकी तरह इनमें खतरनाक लहरें नहीं थीं।

 

वैश्विक अर्थव्यवस्था और व्यापारिक तनाव

संदर्भ एवं पृष्ठभूमि

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF ने चेतावनी दी है कि अमेरिका और चीन के बीच जारी ट्रेड वार दुनिया के आर्थिक विकास की रफ्तार को नुकसान पहुँचाएगा। IMF ने हालिया ग्लोबल इकोनॉमी रिपोर्ट में अमेरिका और चीन के बीच जारी ट्रेड वार को ग्लोबल इकोनॉमी के लिये खतरा बताया है औऱ इससे वैश्विक विकास दर की रफ्तार धीमी होने की आंशका ज़ाहिर की है। IMF ने अपनी रिपोर्ट में इस साल और अगले साल के लिये ग्लोबल ग्रोथ रेट अनुमान को भी घटा दिया है।

क्या है ट्रेड वार?

  • ट्रेड वॉर को हिंदी में कारोबार के ज़रिये युद्ध कह सकते हैंI किसी दूसरे युद्ध की तरह इसमें भी एक देश दूसरे पर हमला करता है और पलटवार के लिये तैयार रहता हैI इसमें विदेशी सामान को निशाना बनाया जाता हैI
  • जब एक देश दूसरे के प्रति संरक्षणवादी रवैया अपनाता है यानी वहाँ से आयात होने वाली वस्तुओं और सेवाओं पर टैरिफ बढ़ाता है तो दूसरा देश भी जवाबी कार्रवाई करता है। ऐसी संरक्षणवादी नीतियों के प्रभाव को ट्रेड वार कहते हैं।
  • इसकी शुरुआत तब होती है जब एक देश को दूसरे देश की व्यापारिक नीतियां अनुचित प्रतीत होती हैं या वह देश रोजगार सृजन के लिए घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने को आयातित वस्तुओं पर टैरिफ बढ़ाता है जैसा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने किया है।
  • ऐसे में जब एक देश दूसरे देश से आने वाले सामान पर टैरिफ़ यानी कर बढ़ाता है तो दूसरा देश भी इसके जवाब में ऐसा ही करता है और इससे दोनों देशों में टकराव बढ़ता हैI
  • इससे देशों की अर्थव्यवस्थाएँ प्रभावित होती हैं जिससे दोनों देशों के बीच राजनीतिक तनाव बढ़ता हैI

टैरिफ क्या होता है?

  • टैरिफ़ टैक्स यानी कर का वह रूप होता है जो विदेशों में बनने वाले सामान पर लगाया जाता हैI
  • सैद्धांतिक रूप से, विदेशी सामान पर कर बढ़ाने का मतलब यह होता है कि वह सामान महँगे हो जाएंगे और लोग उन्हें ख़रीदना कम कर देंगेI
  • ऐसा करने के पीछे मंशा यह होती है कि लोग विदेशी सामान की कमी या उनकी कीमत ज़्यादा होने की स्थिति में स्वदेशी सामान ख़रीदेंगे जिससे घरेलू अर्थव्यवस्था को फ़ायदा होता हैI

वैश्विक वृद्धि दर कम रहने का कारण तथा इसके पीछे के तथ्य

ट्रेड वार में उम्मीद के विपरीत वृद्धि देखी जा रही है। पहले ऐसा लग रहा था कि शायद कुछ मध्यस्थता हो रही है और इसका समाधान निकल रहा है लेकिन अब तो यह हर हफ्ते, हर महीने अपने चरम पर पहुँचता दिखाई दे रहा है।

IMF ने वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट में आर्थिक विकास की रफ़्तार कम होने के चार कारण बताए हैं जिसके कारण इस वर्ष वैश्विक वृद्धि दर में कोई वृद्धि नहीं होगी और वह 3.7 प्रतिशत ही रहेगी। IMF का अगले वर्ष के लिये वृद्धि दर अनुमान 3.9 प्रतिशत था।

  1. चीन अमेरिका के बीच टैरिफ वार।
  2. अमेरिका में ब्याज दर का बढ़ना जिसके कारण भारत जैसे उभरते बाज़ारों से भी वहाँ से पूंजी का प्रवाह हो रहा है। लोग अपना पैसा वापस लेकर जा रहे हैं जिसका प्रभाव अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई दे रहा है।
  3. पूरे यूरो ज़ोन में इकॉनमी स्लोडाउन हो गई है। यूरो ज़ोन के अलावा इंग्लैंड और जापान की अर्थव्यवस्था भी धीमी हो गई है।
  4. अमेरिका और चीन के ऊपर प्रभाव, अर्थात् ट्रेड वार जो कि इन दोनों देशों ने शुरू किया है।
  • रिपोर्ट में कहा गया है कि 17 विकसित अर्थव्यवस्थाओं का नेटवर्थ वैश्विक संकट से पहले की तुलना में 11,000 अरब डॉलर घट चुका है। चीन का नेटवर्थ घटकर सकल घरेलू उत्पाद के 8 फीसदी पर आ गया है, जबकि अमेरिका का नेटवर्थ पिछले चार दशक से लगातार गिर रहा है।
  • व्यापार के मामले में अगर संरक्षणवाद अर्थात् एक-दूसरे के साथ लड़ाई होती रहेगी तो इसका खामियाजा पूरे विश्व को भुगतना पड़ेगा। चीन के साथ अमेरिका की जो लड़ाई चल रही है वह बिल्कुल भी ठीक नहीं है।
  • डोनाल्ड ट्रंप की अमेरिका फर्स्ट (America First) की नीति का पूरी दुनिया कीमत चुका रहा है। इन दोनों देशों के अलावा दुनिया के छोटे देशों को भी इसका खामियाजा भुगतना होगा।

क्या वैश्विक अर्थव्यवस्था वास्तव में खतरनाक मोड़ पर है?

जिस तरह चीन और अमेरिका अपनी जिद पर अड़े हैं और इसकी जद में कई देश आते जा रहे हैं, को देखते हुए IMF की रिपोर्ट में इस तरफ पर्याप्त इशारा किया गया है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था वास्तव में खतरनाक मोड़ पर है।

  • IMF का इशारा इस तरफ भी है कि संरक्षणवाद तथा ट्रेड टैरिफ जिससे कि वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता आई है, से शायद बहुत जल्द ही ट्रेड वार, करेंसी वार में बदल सकता है।
  • जब सरकार अपने देश के उद्योगों को बढ़ाने के लिये विदेशी सामानों पर कई तरह की पाबंदियाँ लगाती हैं तो सरकार के इस क़दम को संरक्षणवाद कहते हैंI
  • अगर ट्रेड वार, करेंसी वार में बदल जाता है तो स्थिति गंभीर होगी क्योंकि करेंसी वार, ट्रेड वार से ज़्यादा व्यापक होता है और इसको नियंत्रित करना काफी कठिन होता है।
  • दूसरी तरफ IMF की रिपोर्ट में इस तरफ भी इशारा किया गया है कि किस तरह से आर्थिक रूप से संपन्न विश्व के दो सबसे बड़े देश एक-दूसरे को निशाना बना रहे हैं जिसका असर उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर सीधा पड़ेगा।
  • IMF की रिपोर्ट में एक जगह यह भी इशारा है कि दोनों देशों के बीच ट्रेड वार के पीछे क्या चीन की नियंत्रण रणनीति (Containment Policy) है? चीन जिस रफ़्तार से आगे बढ़ रहा है अगर उसी रफ़्तार से बढ़ता रहे, उसकी 12 ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी अगर 6.5 प्रतिशत की दर से भी बढ़ती रहे तो 2020 तक यह विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा।
  • अमेरिका की पूरी रणनीति इस बात पर केंद्रित है कि वह किस तरह से चीन को अपने काबू में रखे।
  • अगर देखा जाए तो यह बहुत बड़ा टेक्नोलॉजिकल वार है। इस वार में चीन स्थित टेक्नोलॉजी कंपनियाँ जो कि अपना उत्पादन कर रही हैं, वे एक तरफ हैं तथा वे कंपनियाँ जो चीन से बाहर हैं, वह दूसरी तरफ।
  • जो कंपनियाँ टेक्नोलॉजी के नज़रिये से चीन में हैं वह यह नहीं चाह रही हैं कि चीन के विरुद्ध ऐसा कोई दबाव बने और जो कंपनियाँ चीन में नहीं है वे चाह रही हैं कि ऐसा दौर आए जिससे कि बाहर की टेक्नोलॉजी कंपनियों को फायदा मिले और वह संपूर्ण अर्थव्यवस्था में अपना मार्केट बना सकें।

दोनों देशों के बीच प्रभुत्व की लड़ाई का असर 

अमेरिका और चीन प्रभुत्व की लड़ाई लड़ते हुए नज़र आ रहे हैं। दोनों देशों के लिये जिस तरह का बाज़ार है यदि इसका असर वैश्विक रूप से पड़ता है तो ये दोनों देश प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकते।

  • दोनों देशों के बीच प्रभुत्व की लड़ाई के लिहाज से देखा जाए तो अभी यह शुरुआती दौर में है। जुलाई में ट्रंप ने चीन के उत्पादों पर 34 बिलियन डॉलर का टैरिफ लगाया।
  • इसके बाद अगस्त में अमेरिका ने 16 बिलियन डॉलर का अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया और अभी हाल ही में 24 सितंबर को ट्रंप ने 200 बिलियन डॉलर का अतिरिक्त टैरिफ लगाया। यानी चीन पर कुल 250 बिलियन डॉलर से अधिक का टैरिफ लग चुका है।
  • विश्लेषकों का मानना है कि यह ट्रंप की अमेरिका फर्स्ट नीति से अलग दिखता है और उनका मानना है कि ऐसा लंबे समय से होता आ रहा है। अगर ट्रंप की जगह कोई और होता तो उसे भी यह कदम उठाने ज़रूरी हो जाते।

चीन का दाँव  

  • अमेरिका का आरोप है कि जो भी अमेरिकी कंपनी चीन में काम करने जाती हैं उस पर चीन सरकार उसकी टेक्नोलॉजी बताने के लिये दबाव डालती है और कहती है कि अगर आप हमारे मार्केट का इस्तेमाल करेंगे तो आपको हमें अपनी टेक्नोलॉजी बतानी होगी। अर्थात् चीन में फ़ोर्स टेक्नोलॉजी ट्रांसफर प्रभावी है।
  • अमेरिका के बौद्धिक संपदा अधिकारों को चीन प्रिजर्व नहीं करता। चीन 2003 में WTO का सदस्य बना है परंतु इंटेलेक्चुअल ट्रेडिंग लॉ के अनुसार  अभी तक उसे मार्केट इकॉनमी का स्टेटस हासिल नहीं हो सका है।
  • चीन ने पिछले साल सिल्क एंड रोड इनिशिएटिव पहल की शुरुआत की है। इस नीति का उद्देश्य एशिया, यूरोप और अफ्रीका को जोड़ना है।
  • दरअसल, चीन विकासशील पूर्वी एशिया के आर्थिक केंद्रों को विकसित यूरोपीय आर्थिक क्षेत्रों से जोड़ना चाहता है। यहाँ ‘बेल्ट’ से तात्पर्य सिल्क रोड आर्थिक बेल्ट से है जो तीन स्थल मार्गों से मिलकर बनी है-

♦ चीन, मध्य एशिया और यूरोप को जोड़ने वाला मार्ग।
♦ चीन को मध्य व पश्चिम एशिया के माध्यम से फारस की खाड़ी और भूमध्यसागर से जोड़ने वाला मार्ग।
♦ चीन को दक्षिण-पूर्व एशिया, दक्षिण एशिया और हिन्द महासागर से जोड़ने वाला मार्ग।

  • इस पहल के माध्यम से चीन अपना प्रभुत्व स्थापित करना चाहता है और अमेरिका को इससे बाहर कर देना चाहता है।
  • चीन ने एक और पहल मेड इन चाइना 2020-25 की शुरुआत की है। यह चीनी कंपनियों को व्यापक रूप से अपग्रेड करने की पहल है।
  • इस पहल के तहत चीन यह चाहता है कि पूरी दुनिया में जो भी नई टेक्नोलॉजी, जैसे- आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स या कोई अन्य टेक्नोलॉजी ईजाद हो रही है, उसमें करीब 90 प्रतिशत प्रभुत्व चीन का हो।
  • अमेरिका यह समझता है कि चीन गैर-कानूनी तरीके से यह सब जो कर रहा है उस पर दबाव बनाने के लिये अपनी नीतियों में बदलाव लाना चाहिये। चीन को ओपन मार्केट नहीं दिया जाना चाहिये, नहीं तो चीन को अमेरिकी बाज़ार में खुली छूट देने का परिणाम अमेरिका को भुगतना होगा।

दोनों देशों के बीच जंग को कम करने के लिये अन्य देशों के पास क्या विकल्प है?

चीन और अमेरिका के बीच जो जंग चल रही है उसे वैश्विक स्तर पर कम करने के लिये तमाम देशों को विकल्प के बारे में सोचने से पूर्व दो बातों पर विचार करना होगा-

1. चीन के बारे में अमेरिका और अन्य देश आशंकित हैं कि चीन इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी को प्रोटेक्ट नहीं करता।

2. चीन टेक्नोलॉजी के मामले में मज़बूत नहीं था। इसने बलपूर्वक टेक्नोलॉजी हासिल की है और वह इसके सहारे और भी आगे बढ़ना चाहता है।

  • आज अमेरिका के सामने सबसे बड़ी चुनौती उसकी उत्पादकता है जो काफी कम हो गई है। अमेरिका का आयात उतना नहीं है जितना निर्यात है। अमेरिका के सामानों का निर्यात करना कठिन हो गया है क्योंकि उनकी लागत ज़्यादा हो गई है।
  • ऐसे में अमेरिका का ध्यान अपनी उत्पादकता बढ़ाने पर होना चाहिये लेकिन ऐसा नहीं लगता कि वह आराम से ऐसा कर पाएगा।
  • अमेरिका की इकॉनमी इम्पोर्ट पर निर्भर करती है और वहाँ पर हाई टेक्नोलॉजी आइटम्स का उत्पादन ज़्यादा नहीं है। अमेरिका को इसकी काफी कीमत चुकानी पड़ रही है।
  • चीन ने मार्केट का बहुत बड़ा हिस्सा ले लिया है। चीन अब मिलिट्री पॉवर बन गया है। ऐसे में दुनिया को साथ मिलकर काम करना होगा।
  • एक तरफ ट्रंप चीन पर नियंत्रण करना चाहते हैं तो दूसरी तरफ यह भी कहते हैं कि जापान के ऊपर हमारा बहुत ज़्यादा खर्चा होता है उन्हें जापान को भी सीधा करना है। अपने सहयोगी के साथ ऐसे शब्द इस्तेमाल करना ठीक नहीं है।

निष्कर्ष 

चीन के साथ अमेरिका का ट्रेड वार चल रहा है लेकिन अमेरिका ने इस दायरे को बढ़ा दिया है और अब इसमें ईरान, रूस तथा कई अन्य देश शामिल हैं। अमेरिका की इस दायरे को बढ़ाने की कोशिश खतरनाक हो सकती है और इस संपूर्ण वार में उसे कमज़ोर करती है। अमेरिका ने बहुत सारे फ्रंट खोले हैं जैसे- मेक्सिको और कनाडा के साथ। यूरोप से भी अमेरिका ने कहा कि अल्युमीनियम और स्टील पर टैरिफ लगाया जाएगा परंतु इसे इतना बड़ा मुद्दा नहीं बनने दिया। उसने ऑटोमोबाइल और ऑटो-पार्ट्स पर टैरिफ लगाने की धमकी दी थी लेकिन बढ़ने नहीं दिया। अमेरिका ने चीन को अपना नंबर एक प्रतिद्वंद्वी माना है और उसके साथ कैसे जूझा जाए इसके लिये यह रणनीति अपनाई है। इसे केवल ट्रेड वार समझ कर गलती नहीं करनी चाहिये। यह अ वार फॉर स्ट्रेटेजिक डोमिनेंट ऑफ द वर्ल्ड (A war for strategic dominant in the world) है। यह ट्रेड वार नहीं है।