UPSC DAILY CURRENT IN HINDI 24-10-2018

बेपिकोलम्बो: मिशन मर्करी

Mission Mercury

  • हाल ही में यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ESA) और जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (JAXA) ने सूर्य के निकटतम ग्रह मर्करीके लिये संयुक्त अभियान, बेपिकोलम्बो हेतु सफलता पूर्वक अंतरिक्ष यान का प्रक्षेपण कर लिया।
  • यह अंतरिक्ष यान 2025 में मर्करी ग्रह पर पहुँच जाएगा।
  • यह यूरोपीय और जापानी अंतरिक्ष एजेंसियों का मर्करी हेतु पहला अभियान है।
  • यह एक ही समय में ग्रह और उसके पर्यावरण की माप लेने हेतु दो अंतरिक्ष यान भेजने वाला भी पहला मिशन है।
  • ये कृत्रिम उपग्रह वीनस के आँकड़े भी इकठ्ठा करेंगे।
  • दो प्रकार के अंतरिक्ष यान इस प्रकार हैं-

♦ यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ESA) का मर्करी प्लेनेटरी ऑर्बिटर (MPO)।
♦ जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (JAXA) का मर्करी मैग्नेटोस्फेरिक ऑर्बिटर (MMO या ‘Mio’)।

ग्रीन क्लाइमेट फंड

GCF

  • हाल ही में ग्रीन क्लाइमेट फंड (GCF) ने 19 नई परियोजनाओं के लिये $1 बिलियन से अधिक की मंज़ूरी दे दी है।
  • 2010 में मेक्सिको के कानकुन में पार्टियों के सम्मेलन (COP -16) में UNFCCC (जलवायु परिवर्तन के लिये संयुक्त राष्ट्र संरचना सम्मेलन) के तहत ग्रीन क्लाइमेट फंड स्थापित किया गया था।
  • GCF का उद्देश्य ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को सीमित करने या घटाने में विकासशील देशों को सहायता प्रदान करना है जो विकसित देशों तथा विभिन्न सार्वजनिक एवं निजी स्रोतों द्वारा वित्तपोषित संसाधनों के साथ जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के अनुकूलन की सुविधा प्रदान करना है।
  • नाबार्ड और सिडबी ग्रीन क्लाइमेट फंड (GCF) के लिये राष्ट्रीय कार्यान्वयन इकाई (NIE) के रूप में कार्य करेंगे।
कुंभ मेला

Kumbh Mela

  • कुंभ मेला पृथ्वी पर तीर्थयात्रियों का सबसे बड़ा और शांतिपूर्ण जनसमूह है, जिसके दौरान प्रतिभागी स्नान करते हैं या पवित्र गंगा नदी में डुबकी लगाते हैं।
  • कुंभ मेला यूनेस्को की मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची के अंतर्गत आता है।
  • यह मेला भारत के चार अलग-अलग शहरों में आयोजित होता है इसलिये इसमें विभिन्न सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियाँ शामिल होती हैं, जो इसे सांस्कृतिक रूप से विविधता का पर्व बनाती हैं।
  • यह मेला प्रयागराज (गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती के संगम पर), हरिद्वार (गंगा पर), उज्जैन (शिप्रा पर) और नासिक (गोदावरी पर) में हर चार साल के आवर्तन के बाद आयोजित किया जाता है तथा जाति, पंथ या लिंग की परवाह किये बिना लाखों लोग इसमें भाग लेते हैं।

 

निजीकरण और मानवाधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र -2: शासन व्यवस्था, संविधान, शासन प्रणाली, सामाजिक न्याय तथा अंतर्राष्ट्रीय संबंध।
(खंड- 18 : द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह तथा भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार।)
(खंड- 19 : भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।)

privatisation

चर्चा में क्यों?

संयुक्त राष्ट्र (UN) द्वारा जारी एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, कई समाजों में सार्वजनिक वस्तुओं का व्यापक रूप से निजीकरण मानवाधिकारों को व्यवस्थित रूप से खत्म कर रहा है और गरीबी में रहने वाले लोगों को और अधिक हाशिये पर ले जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र विशेष संवाददाता फिलिप एल्स्टन ने अपनी रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र महासभा में प्रस्तुत की।

  • निजीकरण एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके माध्यम से निजी क्षेत्र तेज़ी से  या पूरी तरह से सरकार द्वारा की गई गतिविधियों के लिये परंपरागत रूप से ज़िम्मेदार होता है, जिसमें मानव अधिकारों की प्राप्ति सुनिश्चित करने के लिये कई उपाय किये जाते हैं।

मानवाधिकारों पर निजीकरण का प्रभाव

  • निजीकरण का इसलिये समर्थन किया जाता है क्योंकि निजी क्षेत्र को अधिक कुशल, वित्त को संगठित करने में अधिक सक्षम, अधिक नवीन और अर्थव्यवस्था के पैमाने पर पूंजी निर्माण में सक्षम तथा लागत कम करने के रूप में देखा जाता है।
  • हालाँकि, नेशनल ऑडिट ऑफिस ऑफ द यूनाइटेड किंगडम द्वारा किये गए अध्ययन में निष्कर्ष निकाला गया कि निजी वित्त मॉडल सार्वजनिक वित्तपोषण की तुलना में अस्पतालों, स्कूलों और अन्य सार्वजनिक आधारभूत संरचना प्रदान करने में अधिक महँगा और कम प्रभावशाली साबित हुआ।
  • निजीकरण उन मान्यताओं पर आधारित है जो कि मूलभूत रूप से उन लोगों से अलग है जो गरिमा और समानता जैसे मानवाधिकारों का सम्मान करते हैं।
  • लाभ ही इसका सर्वोपरि उद्देश्य है और समानता तथा गैर-भेदभाव जैसे विचारों को हटा दिया गया है।
  • निजीकरण व्यवस्था मानव अधिकारों के लिये शायद ही कभी हितकर रही है। गरीबी या कम आय वाले लोग निम्नलिखित तरीकों से निजीकरण से नकारात्मक रूप से प्रभावित हो सकते हैंI
  • आपराधिक न्याय प्रणाली का निजीकरण किया गया है, इसलिये गरीबों पर कई अलग-अलग शुल्क और ज़ुर्माना लगाया जाता है।
  • उन सेवाओं की गुणवत्ता जो वे प्राप्त कर सकते हैं, कम हो जाती है, साथ ही न्याय प्राप्त करने की उनकी संभावना भी कम हो जाती है।
  • सामाजिक सुरक्षा के निजीकरण के परिणामस्वरूप अक्सर गरीबों को एक नए और वित्तीय रूप से कमज़ोर सार्वजनिक क्षेत्र के अधीन किया जाता है।
  • समाज में श्रमिकों की समस्याओं का हल खोजने के लिये एक मॉडल प्रारूप को व्यक्तियों द्वारा सामना की जाने वाली सामाजिक, मनोवैज्ञानिक, आर्थिक चुनौतियों को पहचानने के लिये एक अन्य मॉडल द्वारा प्रतिस्थापित किया जाता है जो कि आर्थिक दक्षता संबंधी चिंताओं से प्रेरित होता है।
  • बुनियादी ढाँचा परियोजनाएँ निजी प्रदाताओं के लिये सबसे आकर्षक हैं जहाँ महत्त्वपूर्ण उपयोगकर्त्ता शुल्क लिया जा सकता है और निर्माण लागत अपेक्षाकृत कम होती है।
  • लेकिन गरीब इस प्रकार के शुल्क का भुगतान नहीं कर पाते हैं इसलिये जल, स्वच्छता, बिजली, सड़क, परिवहन, शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, सामाजिक और वित्तीय सेवाओं जैसी अनेक सेवाओं का उपयोग नहीं कर पाते हैं।
  • सोशल सिक्योरिटी सिस्टम का तेज़ी से निजीकरण किया जा रहा है, जो सेवा आउटसोर्सिंग, सोशल इंश्योरेंस, प्रशासनिक विवेकाधिकार का व्यावसायीकरण और अनुकूल परिणाम प्रदान करने में अग्रणी है।
  • यह दृष्टिकोण निजी लाभकारी संस्थाओं को व्यक्तियों की आवश्यकताओं और क्षमताओं के बारे में दृढ़ संकल्पित करने के लिये सशक्त करता है।

अनुशंसाएँ

  • रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि निजीकरण सिद्धांत रूप में न तो अच्छा है और न ही बुरा लेकिन हाल के दशकों में जिस तरह से निजीकरण हुआ है, उसकी जाँच की जानी चाहिये। इसके लिये निम्नलिखित कदम उठाए जाने चाहिये:
    ♦ मानवाधिकार प्रभावों पर डेटा एकत्र और प्रकाशित किये जाने के लिये निजीकरण के साथ जुड़े सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के भागीदारों द्वारा उचित मानकों को निर्धारित किया जाना चाहिये।
    ♦ विशिष्ट क्षेत्रों तथा गरीब और हाशिये वाले समुदायों के मानवाधिकारों पर निजीकरण के प्रभाव का व्यवस्थित अध्ययन को शामिल किया जाना चाहिये।
    ♦ संधियों, विशेष प्रक्रियाओं, क्षेत्रीय तंत्र तथा राष्ट्रीय संस्थानों के नए तरीकों का अन्वेषण किया जाना चाहिये जो निजीकरण के संदर्भ में उत्तरदायी रूप से राज्यों और निजी क्षेत्र को ज़िम्मेदार ठहरा सकते हैं।

भारतीय संदर्भ में

  • भारत में कई ऐसी सरकारी परियोजनाएँ हैं जो सार्वजनिक-निजी भागीदारी पर आधारित हैं।
  • हाल ही में नीति आयोग ने सरकार द्वारा संचालित ज़िला अस्पतालों में गैर-संचारी रोगों (NCD) से निपटने के लिये सार्वजनिक-निजी साझेदारी (PPP) के लिये दिशा-निर्देश जारी किये हैं।
  • संयुक्त राष्ट्र की यह रिपोर्ट नीति आयोग को अपने दिशा-निर्देशों पर पुनर्विचार करने में मदद कर सकती है।

 

पोषक तत्त्व से समृद्ध हाइब्रिड मक्का

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र – 3 : प्रौद्योगिकी, आर्थिक विकास, जैव विविधता, पर्यावरण, सुरक्षा तथा आपदा प्रबंधन।
(खंड- 2 : समावेशी विकास तथा इससे उत्पन्न विषय।)
(खंड- 4 : मुख्य फसलें- देश के विभिन्न भागों में फसलों का पैटर्न–सिंचाई के विभिन्न प्रकार एवं सिंचाई प्रणाली-कृषि उत्पाद का भंडारण, परिवहन तथा विपणन से संबंधित विषय और बाधाएँ; किसानों की सहायता के लिये ई-प्रौद्योगिकी।)

IARI

चर्चा में क्यों

हाल ही में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) ने एक हाइब्रिड मक्का विकसित किया है जिसके बारे में दावा किया जा रहा है कि यह लाइसिन और ट्रिप्टोफेन के साथ-साथ प्रो-विटामिन-A में भी समृद्ध, दुनिया का पहला मक्का है।

महत्त्वपूर्ण बिंदु

  • गेहूँ और चावल के बाद मक्का भारत का तीसरा सबसे महत्त्वपूर्ण खाद्यान्न है। इसका उपयोग चिप्स, फ्लेक्स, पॉपकॉर्न इत्यादि जैसे खाद्य पदार्थ बनाने के लिये किया जाता है।
  • मक्के के दाने में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा ज़्यादा (65-75%) और प्रोटीन कम (7-12%) होता है तथा इस प्रोटीन में आवश्यक अमीनो एसिड जैसे लाइसिन एवं ट्रिप्टोफेन भी काफी कम मात्रा में होते हैं।
  • लाइसिन एवं ट्रिप्टोफेन आवश्यक अमीनो एसिड (प्रोटीन के बिल्डिंग ब्लॉक) होते हैं जिन्हें शरीर द्वारा संश्लेषित नहीं किया जा सकता है। आहार के द्वारा ही इनकी आपूर्ति की जानी चाहिये।

विकसित मक्का

  • यह हाइब्रिड मक्का (पूसा विवेक QPM 9) लाइसिन और ट्रिप्टोफेन के साथ-साथ प्रो-विटामिन-A में भी समृद्ध, दुनिया का पहला मक्का है।
  • यद्यपि विटामिन-A समृद्ध मक्का कुछ अन्य जगहों पर विकसित किया जा चुका है फिर भी यह नई किस्म महत्त्वपूर्ण है क्योंकि यह न केवल विटामिन-A बल्कि अन्य दो आवश्यक एमिनो एसिड से भी समृद्ध है।
  • इस संशोधित मक्के में दो जीन शामिल हैं। पहला, ओपेक-2 (Opaque-2) जीन जो लाइसिन और ट्रिप्टोफेन की मात्रा को बढ़ाता है तथा दूसरा, सीआरटीआरबी1 (crtRB1) जीन, जिसके परिणामस्वरूप कैरोटीनॉयड (बीटा-कैरोटीन, अल्फा-कैरोटीन और बीटा-क्रिप्टोक्सैंथिन) अधिक मात्रा में प्राप्त होते हैं जो कि शरीर में पहुँचकर विटामिन-A में परिवर्तित हो जाते हैं।
  • सामान्य मक्के में ल्यूटिन और ज़ीएक्सैंथिन अधिक होते हैं। ये ऐसे कैरोटीनॉयड होते हैं जो विटामिन-A में परिवर्तित नहीं हो सकते हैं।
  • बायो-फोर्टिफाइड हाइब्रिड आनुवंशिक रूप से संशोधित नहीं है, क्योंकि ओपेक-2 और सीआरटीआरबी1 जीन किसी भिन्न/असंबंधित पौधे या सूक्ष्मजीव की बजाय मक्के से ही प्राप्त किये गए हैं।

विकसित मक्के की महत्ता

  • भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) द्वारा विकसित किया गया यह मक्का भुखमरी से लड़ने में कारगर हथियार साबित हो सकता है।
  • यह व्यापक आबादी को कुपोषण से छुटकारा दिला सकने में सक्षम है। इसके साथ ही यह ग्लोबल हंगर इंडेक्स (GHI) में भारत की रैंकिंग (2018 में 119 देशों की सूची में भारत 103वें स्थान पर था) में सुधार ला सकता है।