UPSC DAILY CURRENT IN HINDI 25-10-2018

बेपिकोलम्बो: मिशन मर्करी

Mission Mercury

  • हाल ही में यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ESA) और जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (JAXA) ने सूर्य के निकटतम ग्रह मर्करीके लिये संयुक्त अभियान, बेपिकोलम्बो हेतु सफलता पूर्वक अंतरिक्ष यान का प्रक्षेपण कर लिया।
  • यह अंतरिक्ष यान 2025 में मर्करी ग्रह पर पहुँच जाएगा।
  • यह यूरोपीय और जापानी अंतरिक्ष एजेंसियों का मर्करी हेतु पहला अभियान है।
  • यह एक ही समय में ग्रह और उसके पर्यावरण की माप लेने हेतु दो अंतरिक्ष यान भेजने वाला भी पहला मिशन है।
  • ये कृत्रिम उपग्रह वीनस के आँकड़े भी इकठ्ठा करेंगे।
  • दो प्रकार के अंतरिक्ष यान इस प्रकार हैं-

♦ यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ESA) का मर्करी प्लेनेटरी ऑर्बिटर (MPO)।
♦ जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (JAXA) का मर्करी मैग्नेटोस्फेरिक ऑर्बिटर (MMO या ‘Mio’)।

ग्रीन क्लाइमेट फंड

GCF

  • हाल ही में ग्रीन क्लाइमेट फंड (GCF) ने 19 नई परियोजनाओं के लिये $1 बिलियन से अधिक की मंज़ूरी दे दी है।
  • 2010 में मेक्सिको के कानकुन में पार्टियों के सम्मेलन (COP -16) में UNFCCC (जलवायु परिवर्तन के लिये संयुक्त राष्ट्र संरचना सम्मेलन) के तहत ग्रीन क्लाइमेट फंड स्थापित किया गया था।
  • GCF का उद्देश्य ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को सीमित करने या घटाने में विकासशील देशों को सहायता प्रदान करना है जो विकसित देशों तथा विभिन्न सार्वजनिक एवं निजी स्रोतों द्वारा वित्तपोषित संसाधनों के साथ जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के अनुकूलन की सुविधा प्रदान करना है।
  • नाबार्ड और सिडबी ग्रीन क्लाइमेट फंड (GCF) के लिये राष्ट्रीय कार्यान्वयन इकाई (NIE) के रूप में कार्य करेंगे।
कुंभ मेला

Kumbh Mela

  • कुंभ मेला पृथ्वी पर तीर्थयात्रियों का सबसे बड़ा और शांतिपूर्ण जनसमूह है, जिसके दौरान प्रतिभागी स्नान करते हैं या पवित्र गंगा नदी में डुबकी लगाते हैं।
  • कुंभ मेला यूनेस्को की मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची के अंतर्गत आता है।
  • यह मेला भारत के चार अलग-अलग शहरों में आयोजित होता है इसलिये इसमें विभिन्न सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियाँ शामिल होती हैं, जो इसे सांस्कृतिक रूप से विविधता का पर्व बनाती हैं।
  • यह मेला प्रयागराज (गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती के संगम पर), हरिद्वार (गंगा पर), उज्जैन (शिप्रा पर) और नासिक (गोदावरी पर) में हर चार साल के आवर्तन के बाद आयोजित किया जाता है तथा जाति, पंथ या लिंग की परवाह किये बिना लाखों लोग इसमें भाग लेते हैं।

 

सीमापार ऋणशोधन पर दूसरी रिपोर्ट

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र – 3 : प्रौद्योगिकी, आर्थिक विकास, जैव विविधता, पर्यावरण, सुरक्षा तथा आपदा प्रबंधन।
(खंड- 1 : भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।)

insolvency

चर्चा में क्यों?

कंपनी मामले के मंत्रालय द्वारा भारतीय दिवाला एवं दिवालियापन संहिता, 2016 में संशोधन की संस्तुति के लिये गठित ऋणशोधन कानून समिति (Inslovency Law Committee- ILC) ने अपनी दूसरी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है।

समिति की सिफारिशें

  • ILC ने सीमापार ऋणशोधन के लिये 1957 के The United Nations Commission on International Trade Law (UNCITRAL) प्रारूप कानून को लागू करने की संस्तुति की है, क्योंकि इसमें सीमापार ऋणशोधन संबंधी मुद्दे से निपटने के लिये व्यापक प्रावधान शामिल हैं।
  • समिति ने घरेलू ऋणशोधन क्षमता संबंधी प्रावधानों और प्रस्तावित सीमापार ऋणशोधन से जुड़े प्रावधानों के बीच किसी प्रकार की असंगति को दूर करने के लिये भी कुछ प्रावधानों की संस्तुति की है।

UNCITRAL

  • UNCITRAL प्रारूप कानून को लगभग 44 देशों में लागू किया गया है। इसलिये इसमें सीमापार ऋणशोधन से जुड़े मुद्दों से निपटने के लिये अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सर्वश्रेष्ठ परंपराओं को शामिल किया गया है।
  • घरेलू प्रक्रियाएँ और लोगों के हितों की रक्षा से जुड़े प्रावधान शामिल होने की वज़ह से यह लाभकारी है।
  • विदेशी निवेशकों के बीच अधिक विश्वास पैदा करना, घरेलू ऋणशोधन कानून के साथ मज़बूती से जुड़ना और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के लिये एक मज़बूत तंत्र कायम करना इसकी अन्य विशेषताओं में शामिल हैं।
  • इस प्रारूप कानून में सीमापार ऋणशोधन के चार प्रमुख सिद्धांत शामिल हैं, जैसे-
    1. किसी उल्लंघनकर्त्ता कर्ज़दार के विरुद्ध घरेलू ऋणशोधन प्रक्रिया में भाग लेने अथवा उसे शुरू करने के लिये विदेशी ऋणशोधन व्यवसायियों और विदेशी ऋणदाताओं तक सीधी पहुँच।
    2. विदेशी प्रक्रियाओं को मान्यता और सुधार के प्रावधान।
    3. घरेलू और विदेशी न्यायालयों तथा ऋणशोधन कारोबारियों के बीच सहयोग कायम करना।
    4. विभिन्न देशों में दो अथवा अधिक ऋणशोधन प्रक्रियाओं के बीच समन्वय कायम करना।

भारत के लिये सीमापार ऋणशोधन फ्रेमवर्क की आवश्यकता

  • दिवाला और दिवालियापन संहिता के तहत सीमापार ऋणशोधन फ्रेमवर्क की आवश्यकता इस तथ्य से उत्पन्न होती है कि कई भारतीय कंपनियों के पास वैश्विक पहचान है और कई विदेशी कंपनियों की भारत सहित कई देशों में मौजूदगी है।

निष्कर्ष

  • भारत की दिवाला और दिवालियापन संहिता, 2016 में सीमापार ऋणशोधन संबंधी खंड का समावेश एक बड़ा कदम होगा और इस प्रकार भारत का दिवालियापन कानून और अधिक परिपक्व होगा।