UPSC DAILY CURRENT IN HINDI 3010-2018

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Druzhba-III है:

A) रूस का नया अंतरिक्ष अभियान
B) इज़राइल की परमाणु मिसाइल
C) पाकिस्तान-रूस सैन्य अभ्यास
D) संयुक्त अरब अमीरात एवं अमेरिका का सैन्य अभ्यास
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उत्तर : C
व्याख्या :

  • Druzhba-III पाकिस्तान और रूस के बीच एक द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास है। हाल ही में इस अभ्यास का 2018वां संस्करण पाकिस्तान में आयोजित किया गया। इस सैन्य अभ्यास की शुरुआत वर्ष 2016 में हुई थी।
  • ‘Druzba’ एक रूसी शब्द है, जिसका अर्थ “मित्रता” होता है।
  • आयरन मैजिक 19 यह संयुक्त अरब अमीरात और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच हुआ एक संयुक्त सैन्य अभ्यास है। हाल ही में दुबई में इसका आयोजन किया गया।
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हाल ही में चर्चा में रहे मिगिंगो द्वीप के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

  1. यह चीन और जापान के मध्य अवस्थित एक द्वीप है।
  2. यह विक्टोरिया झील में स्थित है।
  3. यह एक चट्टानी द्वीप है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

A) केवल 1 और 3
B) केवल 2 और 3
C) केवल 3
D) उपरोक्त सभी
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उत्तर : B
व्याख्या :

  • मिगिंगो एक छोटा चट्टानी द्वीप है, जो विक्टोरिया झील में स्थित है। यह अफ्रीका की सबसे बड़ी झील होने के साथ-साथ दुनिया की सबसे बड़ी उष्णकटिबंधीय झील भी है।
  • एक दशक से अधिक से मिगिंगो द्वीप युगांडा और केन्या के बीच तनाव का कारण रहा है, यह अभी तक तय नही हो पाया है कि यह वास्तव में किसके क्षेत्राधिकार में आता है।
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हाल ही में चर्चा में रहा ‘गेमिंग गैराज’ क्या है?

A) नया वीडियो गेम
B) आंध्र प्रदेश की नई योजना
C) पश्चिम बंगाल का नया ऑटोमोबाइल केंद्र
D) गूगल का नया फीचर
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उत्तर : B
व्याख्या :

आंध्र प्रदेश सरकार ने रोज़गार के अवसरों में वृद्धि करने, उद्यमियों और खेल निर्माताओं को इसके बढ़ते महत्त्व के मद्देनज़र प्रोत्साहित करने हेतु ‘गेमिंग गैराज’ को शुरू करने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया है। जल्द ही ‘गेमिंग गैराज’ को विजयवाड़ा में लॉन्च किया जाएगा।

मुख्य बिंदु

  • यूनिटी टेक्नोलॉजिज़ (डेनमार्क/सैन फ्रांसिस्को) जैसी कंपनियाँ इसके लिये सॉफ्टवेयर उपलब्ध कराएंगी। फिनलैंड की कजाणी युनिवर्सिटी (The Kajaani University of Applied Sciences – KAMK) ज्ञान/परिचालन भागीदार होगी।
  • इसके अंतर्गत कोई भी रचनात्मक सोच वाला व्यक्ति अपनी पसंद का खेल तैयार कर सकता है। इस कार्य के लिये सरकार उन्हें “आवश्यक सॉफ्टवेयर और मुफ्त बुनियादी ढाँचा” उपलब्ध कराएगी।
  • अप्रैल 2018 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस क्षेत्र के अंतर्गत सर्वश्रेष्ठ मेधाओं को आकर्षित करने के उद्देश्य से वर्ष 2020 तक 6,400 करोड़ रुपए के निवेश के साथ एनिमेशन और दृश्य प्रभाव, गेमिंग तथा कॉमिक्स नीति को मंज़ूरी दी थी।
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वर्ष 2018 के शक्ति भट्ट पुरस्कार से किसे सम्मानित किया गया है?

A) नादिया मुराद
B) सुजाता गिडाला
C) एंड्रस ऐनसिप
D) एना बर्न्स
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उत्तर : B
व्याख्या :

भारतीय मूल की अमेरिकी लेखक सुजाता गिडाला को उनकी पहली पुस्तक “Ants Among Elephants: An Untouchable Family and the Making of Modern India” के लिये वर्ष 2018 के शक्ति भट्ट प्रथम पुस्तक पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

शक्ति भट्ट प्रथम पुस्तक पुरस्कार

  • शक्ति भट्ट प्रथम पुस्तक पुरस्कार, शक्ति भट्ट फाउंडेशन द्वारा वित्त पोषित किया जाता है। युवा लेखक और संपादक शक्ति भट्टी की याद में वर्ष 2008 में इसकी शुरुआत की गई।
  • भारतीय उपमहाद्वीप के नए लेखकों को उनके उत्कृष्ट कार्य के लिये यह सम्मान दिया जाता है। इसके तहत 2 लाख रुपए का नकद पुरस्कार दिया जाता है।

अन्य बिंदु

  • डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ़ कांगो के डेनिस मुकवेगे और इराक की नादिया मुराद को वर्ष 2018 के नोबेल शांति पुरस्कार के लिये चुना गया है।
  • एंड्रस ऐनसिप यूरोपीय आयोग के उपाध्‍यक्ष है।
  • उत्तरी आयरलैंड की लेखिका एना बर्न्स मैन बुकर पुरस्कार, 2018 की विजेता है। एना बर्न्स को उनके प्रसिद्ध उपन्यास ‘मिल्कमैन’ के लिये यह पुरस्कार दिया गया।
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हाल ही में ‘कोरल रीफ की स्थिति और संरक्षण’ (STAPCOR 2018) का आयोजन किया गया। इसके संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

  1. इस सम्मलेन का आयोजन  जूलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया द्वारा किया गया।
  2. 2018 को रीफ के तीसरे अंतर्राष्ट्रीय वर्ष (IYOR) के रूप में घोषित किया है, इससे पहले 2008 को रीफ के दूसरे अंतर्राष्ट्रीय वर्ष के रूप में घोषित किया था।
  3. प्रवाल भित्तियों अर्थात् कोरल रीफ को विश्व के सागरीय जैव विविधता का उष्ण स्थल (Hotspot) माना जाता है तथा इन्हें समुद्रीय वर्षावन भी कहा जाता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

A) केवल 2
B) केवल 3
C) केवल 2 और 3
D) उपरोक्त सभी
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उत्तर : D
व्याख्या :

हाल ही में लक्षद्वीप में ‘रीफ फॉर लाइफ’ थीम के तहत कोरल रीफ की स्थिति और संरक्षण (STAPCOR 2018) पर 3 दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन का आयोजन जूलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया द्वारा किया गया था। अंतर्राष्ट्रीय कोरल रीफ पहल (ICRI) ने 2018 को रीफ के तीसरे अंतर्राष्ट्रीय वर्ष (IYOR) के रूप में घोषित किया है।

  • IYOR की घोषणा पहली बार कोरल रीफ और उससे संबंधित पारिस्थितिकी तंत्र, जैसे-मैंग्रोव वन तथा समुद्री शैवाल के ऊपर बढ़ते खतरों के जवाब में अंतर्राष्ट्रीय कोरल रीफ पहल द्वारा की गई थी।
  • अंतर्राष्ट्रीय कोरल रीफ पहल ने 2008 को रीफ के दूसरे अंतर्राष्ट्रीय वर्ष के रूप में घोषित किया था।
कोरल रीफ
  • प्रवाल भित्तियाँ या मूंगे की चट्टानें (Coral reefs) समुद्र के भीतर स्थित प्रवाल जीवों द्वारा छोड़े गए कैल्शियम कार्बोनेट से बनी होती हैं।
  • प्रवाल कठोर संरचना वाले चूना प्रधान जीव (सिलेन्ट्रेटा पोलिप्स) होते हैं। इन प्रवालों की कठोर सतह के अंदर सहजीवी संबंध से उत्पन्न रंगीन शैवाल जूजैंथिली (Zooxanthellae) पाए जाते हैं।
  • प्रवाल भित्तियों को विश्व के सागरीय जैव विविधता का उष्ण स्थल (Hotspot) माना जाता है तथा इन्हें समुद्रीय वर्षावन भी कहा जाता है।

 

केदारनाथ वन्यजीव अभयारण्य (KWS) में पतंगा

KWS

  • केदारनाथ वन्यजीव अभयारण्य (KWS) 975 वर्ग किलोमीटर से भी अधिक क्षेत्र में फैला हुआ है। यह सबसे आकर्षक जैव विविधता के साथ-साथ मध्यकालीन मंदिरों का भी स्थान है।
  • उत्तराखंड के राजकीय फूल रोडोडेंड्रॉन (Rhododendrons) की 200 से भी अधिक प्रजातियाँ (जिसे उतराखंड के स्थानीय इलाकों में बुरांस के रूप में जाना जाता है) KWS में पाई जाती हैं।
  • उतराखंड के चमोली और रुद्रप्रयाग ज़िलों में फैला केदारनाथ वन्यजीव अभयारण्य (KWS) पश्चिमी हिमालय के सबसे प्रमुख संरक्षित क्षेत्रों में से एक तथा लुप्तप्राय कस्तूरी हिरण का आवास है।
  • KWS पतंगा प्रजातियों (Moths) का एक अनमोल आवास है जो जैव विविधता का एक महत्त्वपूर्ण संकेतक है।
  • पतंगा अलग-अलग विभिन्न स्थलों पर व्यापक रूप से पाए जाते हैं। इन स्थलों में समशीतोष्ण, शंकुधारी और अल्पाइन जंगलों से लेकर अल्पाइन घास के मैदान (बुग्याल) तक शामिल हैं।
  • पतंगा प्रजातियाँ वन के स्वास्थ्य संकेतक के रूप में साबित हुए हैं और प्राकृतिक आवास के नष्ट होने तथा जलवायु परिवर्तन की वर्तमान स्थिति में ये बेहद महत्त्वपूर्ण हैं। उनकी पारिस्थितिकी का अध्ययन करना, पारिस्थितिकीय पदानुक्रम में परिवर्तनों को समझने में सहायक होगा।
मिगिनगो द्वीप विवाद

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  • विक्टोरिया झील स्थित मिगिनगो द्वीप पर पड़ोसी केन्या और युगांडा अपनी संप्रभुता का दावा करते रहे हैं। घनी आबादी वाले इस द्वीप का क्षेत्रफल एक हेक्टेयर से भी कम है।
  • एक दशक से भी अधिक समय से मिगिनगो द्वीप केन्या और युगांडा के बीच तनाव का कारण बना हुआ है। दोनों देश यह निश्चय करने में असमर्थ हैं कि वास्तव में इस द्वीप पर किसकी संप्रभुता है।
  • वर्ष 2000 की शुरुआत में जब द्वीप पर लोगों ने निवास करना शुरू किया था तब सभी मानचित्रों पर इस द्वीप को केन्या के अंतर्गत दिखाया गया था। इसने युगांडा के अधिकारियों का ध्यान आकर्षित करना शुरू किया और उन्होंने मछुआरों पर कर लगाने के लिये मिगिनगो में अधिकारी भेजे, साथ ही समुद्री डाकुओं से सुरक्षा का प्रस्ताव भी उनके सामने रखा।
  • युगांडा के इस कदम के बाद मछुआरों ने केन्या सरकार से मुलाकात की और केन्या सरकार ने इस पर कदम उठाते हुए मिगिनगो में सुरक्षाकर्मी तैनात कर दिये जिसके चलते दोनों देशों के बीच वर्ष 2009 में तनाव और बढ़ गया।
  • इसके बाद केन्या और युगांडा ने यह निर्धारित करने के लिये कि पानी की सीमा कहाँ तक है, एक संयुक्त कमीशन बनाने का फैसला किया लेकिन संयुक्त कमीशन द्वारा अभी तक कोई निर्णायक फैसला नहीं लिया गया है।
चुनावी बॉण्‍ड योजना-2018

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हाल ही में भारत सरकार ने चुनावी बॉण्ड योजना-2018 को अधिसूचित किया है।

  • योजना के प्रावधानों के अनुसार, चुनावी बॉण्‍ड की खरीद ऐसे व्‍यक्ति द्वारा की जा सकती है, जो भारत का नागरिक हो या भारत में निगमित या स्‍थापित हो।
  • व्‍यक्ति विशेष के रूप में कोई भी व्‍यक्ति एकल रूप से या अन्‍य व्‍यक्तियों के साथ संयुक्‍त रूप से चुनावी बॉण्‍डों की खरीद कर सकता है।
  • केवल से राजनीतिक पार्टियाँ, जो जन प्रतिनिधित्‍व अधिनियम, 1951 (1951 का 43) के अनुच्‍छेद 29ए के तहत पंजीकृत हों और जिन्होंने आम लोकसभा चुनावों या राज्‍य विधानसभा चुनावों में डाले गए मतों के एक प्रतिशत से कम मत प्राप्‍त नहीं किये हों, चुनावी बॉण्‍ड प्राप्‍त करने की पात्र होंगी।
  • चुनावी बॉण्‍डों को किसी योग्‍य राजनीतिक पार्टी द्वारा केवल अधिकृत बैंक के खाते के माध्‍यम से ही भुनाया जा सकेगा।
  • भारतीय स्‍टेट बैंक को बिक्री के छठे चरण में अपनी 29 अधिकृत शाखाओं (सूची संलग्‍न) के माध्‍यम से 01-10 नवंबर 2018 तक चुनावी बॉण्‍डों को जारी करने तथा भुनाने के लिये अधिकृत किया गया है।
  • यह ध्यान दिया जा सकता है कि चुनावी बॉण्‍ड जारी होने की तारीख से पंद्रह कैलेंडर दिनों के लिये मान्य होंगे और यदि वैधता अवधि समाप्त होने के बाद चुनावी बॉण्‍ड जमा किया जाता है तो किसी भी भुगतानकर्त्ता राजनीतिक पार्टी को कोई भुगतान नहीं किया जाएगा।
  • एक योग्य राजनीतिक दल द्वारा जमा किये गए चुनावी बॉण्‍ड को उसी दिन खाते में जमा किया जाएगा।

क्या है चुनावी बॉण्ड? 

  • यदि हम बॉण्ड की बात करें तो यह एक ऋण सुरक्षा है। चुनावी बॉण्ड का जिक्र सर्वप्रथम वर्ष 2017 के आम बजट में किया गया था।
  • दरअसल, यह कहा गया था कि RBI एक प्रकार का बॉण्ड जारी करेगा और जो भी व्यक्ति राजनीतिक पार्टियों को दान देना चाहता है, वह पहले बैंक से बॉण्ड खरीदेगा फिर वह जिस भी राजनैतिक दल को दान देना चाहता है, उसे दान के रूप में बॉण्ड दे सकता है।
  • राजनैतिक दल इन चुनावी बॉण्ड की बिक्री अधिकृत बैंक को करेंगे और वैधता अवधि के दौरान राजनैतिक दलों के बैंक खातों में बॉण्ड के खरीद के अनुपात में राशि जमा करा दी जाएगी।
हिमालयी पारिस्थितिक तंत्र में शलभ (Moth) का महत्त्व

Moth

वैसे तो Moth (शलभ/कीट/पतंगा) को व्यापक रूप से केवल एक कीट ही माना जाता है लेकिन जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ZSI) के वैज्ञानिकों द्वारा हाल ही में किये गए एक अध्ययन से पता चला है कि ये कीट समूह हिमालयी पारिस्थितिक तंत्र में कई पौधों के परागण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

  • यह अध्ययन “असेसमेंट ऑफ मोथ्स (लेपिडोप्टेरा) एज़ सिग्निफिकेंट पोलिनेटर्स इन द हिमालयन इकोसिस्टम ऑफ नार्थ ईस्टर्न इंडिया” शीर्षक वाले प्रोजेक्ट के अंतर्गत किया गया तथा इस प्रोजेक्ट के तहत अध्ययन के लिये वैज्ञानिकों ने विभिन्न पारिस्थितिक तंत्र से Moths के नमूने एकत्र किये।
  • Moths की लगभग एक दर्ज़न प्रजातियों में सूँड़ (Proboscis), फूलों का रस चूसने के लिये  कीटों द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला एक लंबा और धागे जैसे अंग का विश्लेषण इन कीटों में परागकणों की उपस्थिति का खुलासा करता है।
  • यह विशेष अध्ययन पौधे-पतंग परस्पर क्रियाओं पर आधारित है।
  • यह अध्ययन अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में किया गया था।
  • इस अध्ययन के अंतर्गत सबसे बड़ा खुलासा विभिन्न Moth प्रजातियों में सूँड़ की संरचना थी।
  • इस अध्ययन को इसलिये भी महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसमें वैज्ञानिकों ने परागण स्रोतों के रूप में कीटों के नए समूह Moth का अध्ययन किया है। आमतौर पर मधुमक्खी, ततैया (Wasp) और तितलियों को परागण का प्रमुख स्रोत माना जाता है।
  • भारत में पाई जाने वाली कीट प्रजातियों की संख्या अनुमानतः 12,000 है।
  • शोधकर्त्ताओं के अनुसार दुनिया के कुछ हिस्सों में पिछले 40 वर्षों में लगभग दो तिहाई आम तौर पर पाई जाने वाली बड़ी Moth प्रजातियों में गिरावट आई है। गिरावट के मुख्य कारणों में से एक प्रकाश प्रदूषण (Moth आवास में कृत्रिम प्रकाश में वृद्धि) है।

 

डिजिटल इंडिया 2.0

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र–3: प्रौद्योगिकी, आर्थिक विकास, जैव विविधता, पर्यावरण, सुरक्षा तथा आपदा प्रबंधन 
(खंड- 1 : भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय)

Digital India

संदर्भ

दूरसंचार विभाग वाई-फाई संचालन हेतु अतिरिक्त स्पेक्ट्रम को मुक्त करने के लिये देश में डिजिटल सेवाओं के विकास हेतु बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। यह 2019 तक दस लाख अंतःप्रचालनीय (interoperable) वाई-फाई हॉटस्पॉट को शुरू करने की योजना के साथ संयुक्त रूप से सार्वजनिक इंटरनेट पहुँच के संदर्भ में भारत-वैश्विक मानकों के अनुरूप आगे बढ़ रहा है।

प्रमुख बिंदु 

  • वैश्विक स्तर पर औसतन प्रत्येक 150 लोगों के लिये एक वाई-फाई हॉटस्पॉट मौजूद है।
  • भारत की आबादी के आकार के अनुसार यहाँ करीब आठ मिलियन हॉटस्पॉट होने चाहिये थे। हालाँकि, भारत में हॉटस्पॉट की कुल संख्या केवल 31,500 है।
  • इस तथ्य के बावजूद कि भारत में दुनिया का सबसे बड़ा सेलुलर नेटवर्क है। दूरसंचार कंपनियाँ अब तक सार्वजनिक वाई-फाई एक्सेस मॉडल बनाने से दूर रही हैं जो मुख्य रूप से अपने मुख्य व्यवसाय के नुकसान से डरती हैं।
  • लेकिन डेटा की खपत तेज़ी से बढ़ रही है, जल्द ही ऐसा समय आएगा जब अकेले सेलुलर नेटवर्क मांग को पूरा करने में सक्षम नहीं होंगे।
  • यह अनुमान लगाया गया है कि भारत में प्रति स्मार्टफोन का मासिक डेटा उपयोग 2017 के 5.7 जीबी से बढ़कर 2023 तक 13.7 जीबी हो जाएगा।
  • इस वृद्धि के समर्थन के लिये दूरसंचार कंपनियों को नेटवर्क का जाल बिछाने की आवश्यकता होगी जिसमें परंपरागत सेलुलर आधारभूत संरचना का चयन, ऑप्टिकल फाइबर केबल्स और सार्वजनिक वाई-फाई एक्सेस पॉइंट्स द्वारा किया जा सके।
  • वाई-फाई सेवाएँ आमतौर पर अनचाहे स्पेक्ट्रम बैंड पर चलती हैं जिन्हें ऑपरेटरों द्वारा महँगी नीलामी के माध्यम से खरीदे बिना इन तक आसानी से पहुँचा जा सकता है।
  • वैश्विक स्तर पर हॉटस्पॉट की संख्या में 568 फीसदी की वृद्धि हुई है लेकिन भारत में यह वृद्धि सिर्फ 12 प्रतिशत है।
  • 5 गीगाहर्ट्ज फ्रीक्वेंसी बैंड में 605 मेगाहर्ट्ज़ स्पेक्ट्रम को मुक्त करने के निर्णय से वाई-फाई सेवाओं के लिये मौजूदा क्षमता से दस गुना अधिक बैंडविड्थ (बैंड की चौड़ाई) उपलब्धता में वृद्धि हुई है।
  • प्रस्तावित दस लाख वाई-फाई हॉटस्पॉट को इंटरऑपरेबल बनाने के लिये उपयोगकर्त्ताओं को वाई-फाई नेटवर्क से साइन-इन किये बिना सहजता से आने की अनुमति मिल जाएगी।
  • वर्तमान में जब कोई उपयोगकर्त्ता वाई-फाई नेटवर्क का उपयोग करना चाहता है तो कई बाधाएँ उपस्थित होती हैं। सबसे पहले मोबाइल नेटवर्क से वाई-फाई कवरेज में हैंडओवर निर्बाध गति से नहीं होता है। प्रत्येक बार जब उपयोगकर्त्ता सेलुलर नेटवर्क से वाई-फाई नेटवर्क तक जाता है, तो इंटरनेट एक्सेस में व्यवधान उत्पन्न होता है।
  • दूसरा, यदि वाई-फाई नेटवर्क को एक ऑपरेटर द्वारा प्रबंधित किया जाता है जो उपयोगकर्त्ता के मोबाइल ऑपरेटर से अलग होता है तो उपयोगकर्त्ता को सेवा तक पहुँचने के लिये साइन इन करना होता है। एक इंटरऑपरेबल नेटवर्क के तहत, इन मुद्दों को हल किया जाता है।
  • नीति निर्माताओं को अब वाई-फाई इंफ्रास्ट्रक्चर शुरू करने हेतु उन्हें सक्षम बनाने के लिये इस तरह के प्रयासों को आगे बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिये।
  • भारत के दूरसंचार नियामक प्राधिकरण को छोटे व्यापारियों, किराना स्टोर्स और अन्य विक्रेताओं को सार्वजनिक डेटा कार्यालय स्थापित करने की अनुमति देने में बिना देरी किये इसे लागू किया जाना चाहिये। ऐसा डेटा के लिये भी किया जा सकता है, जैसा कि पीसीओ ने लंबी दूरी की टेलीफोन सेवाओं के लिये किया था।

 

आज़ाद हिंद सरकार की 75वीं वर्षगाँठ

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र-1 : भारतीय विरासत और संस्कृति, विश्व का इतिहास एवं भूगोल और समाज।
(खंड- 02 : 18वीं सदी के लगभग मध्य से लेकर वर्तमान समय तक का आधुनिक भारतीय इतिहास- महत्त्वपूर्ण घटनाएँ, व्यक्तित्व, विषय।)
(खंड- 03 : स्वतंत्रता संग्राम- इसके विभिन्न चरण और देश के विभिन्न भागों से इसमें योगदान देने वाले महत्त्वपूर्ण व्यक्ति/उनका योगदान।)

Azad Hind Government

चर्चा में क्यों?

21 अक्तूबर, 2018 को नई दिल्ली स्थित लाल किले में आजाद हिंद सरकार के गठन की 75वीं वर्षगाँठ मनाई गई।

प्रमुख बिंदु

  • 75 साल पहले वर्ष 1943 में नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने सिंगापुर में आज़ाद हिंद (जिसे अरजी हुकुमत-ए-आज़ाद हिंद के रूप में भी जाना जाता है) के रूप में अस्थायी सरकार की स्थापना की घोषणा की थी।
  • इसे इंपीरियल जापान, नाजी जर्मनी, इतालवी सोशल रिपब्लिक और उनके सहयोगियों की ध्रुवीय शक्तियों का समर्थन प्राप्त था।
  • इस सम्मानित स्वतंत्रता सेनानी ने द्वितीय विश्वयुद्ध के उत्तरार्द्ध के दौरान निर्वासन में अस्थायी सरकार के ध्वज के तहत ब्रिटिश शासन से भारत को मुक्त करने के लिये संघर्ष शुरू किया था।

पृष्ठभूमि

  • सुभाष चंद्र बोस को इस बात का दृढ़ विश्वास था कि सशस्त्र संघर्ष ही भारत को स्वतंत्र करने का एकमात्र तरीका है। 1920 और 1930 के दशक में वह भारतीय राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस के कट्टरपंथी दल के नेता रहे, 1938-1939 में कॉन्ग्रेस अध्यक्ष बनने की राह पर आगे बढ़ रहे थे लेकिन महात्मा गांधी और कॉन्ग्रेस नेतृत्व के साथ मतभेदों के बाद उन्हें हटा दिया गया।
  • उनकी अस्थायी सरकार के अंतर्गत विदेशों में रहने वाले भारतीय एकजुट हो गए थे। इंडियन नेशनल आर्मी ने मलाया (वर्तमान में मलेशिया) और बर्मा (अब म्याँमार) में रहने वाले प्रवासी भारतीयों, पूर्व कैदियों और हज़ारों स्वयंसेवक नागरिकों को आकर्षित किया।
  • अस्थायी सरकार के तहत, बोस राज्य के मुखिया, प्रधानमंत्री और युद्ध तथा विदेश मामलों के मंत्री थे। कैप्टन लक्ष्मी सहगल ने महिला संगठन की अध्यक्षता की, जबकि एस.ए. अय्यर ने प्रचार और प्रसार विंग का नेतृत्व किया। क्रांतिकारी नेता रास बिहारी बोस को सर्वोच्च सलाहकार नियुक्त किया गया था।
  • जापानी कब्ज़े वाले अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में भी अस्थायी सरकार बनाई गई थी। 1945 में अंग्रेजों द्वारा इन द्वीपों पर पुनः कब्ज़ा कर लिया गया था।
  • बोस की मौत आज़ाद हिंद आंदोलन के अंत के रूप में देखी गई थी। द्वितीय विश्व युद्ध भी 1945 में ध्रुवीय शक्तियों की हार के साथ समाप्त हुआ।
  • निश्चित रूप से आज़ाद हिंद फौज या इंडियन नेशनल आर्मी (INA) की भूमिका स्वतंत्रता के लिये भारत के संघर्ष को प्रोत्साहन देने में महत्त्वपूर्ण रही थी।