UPSC,PCS DAILY CURRENT 30-04-2018

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संयुक्त राष्ट्र मरुस्थलीकरण रोकथाम अभिसमय (United Nations Convention to Combat Desertification: UNCCD) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजियेः

  1. अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मरुस्थलीकरण की समस्या को हल करने का यह एकमात्र फ्रेमवर्क है।
  2. यह अभिसमय कानूनी रूप से बाध्यकारी है।
  3. संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2010 से 2020 को यूनाइटेड नेशन डिकेड फॉर डेजर्ट्स एंड फाइट अगेंस्ट डेजर्टीफिकेशन घोषित किया है।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 2 और 3
C) 1, 2 और 3
D) केवल 1 और 3

उत्तरः (c)
व्याख्याः

संयुक्त राष्ट्र मरुस्थलीकरण रोकथाम अभिसमय (UNCCD)

unccd

  • उपजाऊ भूमि के मरुस्थल भूमि में तब्दील होने की समस्या से निपटने के उपायों पर चर्चा करने के लिये 1 जून, 1994 में पेरिस में संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन पर चर्चा के बाद एक वैश्विक संधि तैयार की गई जिसे दिसंबर 1996 में लागू किया गया।
  • अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मरुस्थलीकरण की समस्या को हल करने के लिये कानूनी रूप से बाध्यकारी यह एकमात्र फ्रेमवर्क है।
  • भारत अक्तूबर 1994 को इस संधि में शामिल हुआ तथा दिसंबर 1996 को इसकी पुष्टि की। भारत के संदर्भ में संधि से जुड़ी सभी व्यवस्थाओं के बीच समन्वय स्थापित करने की जिम्मेदारी पर्यावरण वन और जलवायु मंत्रालय की है।
  • यह अभिसमय विशेष रूप से ऐसे क्षेत्रों को संबोधित करता है जिसे शुष्क और अर्द्धशुष्क क्षेत्र के रूप में जाना जाता है।
  • UNCCD (2008-2018) की 10 साल की रणनीतिः इसे 2007 में मरुस्थलीकरण/भूमि निम्नीकरण को रोकने उत्क्रमित करने के लिये एक वैश्विक साझेदारी के रूप में अपनाया गया था। इसका लक्ष्य गरीबी में कमी और पर्यावरणीय स्थिरता का समर्थन करने के लिये प्रभावित क्षेत्रों में सूखे के प्रभाव को कम करना है।
  • संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2010 से 2020 को यूनाइटेड नेशन डेकेड फॉर डेजर्ट्स एंड फाइट अगेंस्ट डेजर्टीफिकेशन घोषित किया है।
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अनुसूचित क्षेत्र के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?

  1. भारत के संविधान की पाँचवीं अनुसूची में ‘अनुसूचित क्षेत्र’ को परिभाषित किया गया है।
  2. राज्य सरकार किसी भी क्षेत्र को अनुसूचित क्षेत्र घोषित कर सकती हैं।
  3. जनजातीय सलाहकार परिषद की स्थापना केवल अनुसूचित क्षेत्रों में ही की जाती है।

कूटः

A) केवल 1
B) केवल 2 और 3
C) केवल 1, 2 और 3
D) 1 और 3

उत्तरः (a)
व्याख्याः

  • संविधान के अनुच्छेद 244(1) के अंतर्गत पाँचवीं अनुसूची में “अनुसूचित क्षेत्रों“ की परिभाषा ऐसे क्षेत्रों के रूप में दी गई है जिन्हें राष्ट्रपति उस राज्य के राज्यपाल के साथ परामर्श करने के बाद आदेश द्वारा अनुसूचित क्षेत्र घोषित करे। अनुसूचित क्षेत्र को पहली बार 1950 में अधिसूचित किया गया था। अतः पहला कथन सत्य है।
  • दूसरा कथन असत्य है। राज्य सरकार के पास किसी क्षेत्र को अनुसूचित क्षेत्र घोषित करने का आधिकार नही होता है।
  • अनुसूचित क्षेत्रों वाले राज्यों में जनजाति सलाहकार परिषद (टी.ए.सी.) की स्थापना की जाएगी। राष्ट्रपति के निर्देश पर किसी ऐसे राज्य में भी टी.ए.सी. की स्थापना की जा सकती है  जिसमें अनुसूचित जनजातियां हों लेकिन कोई अनुसूचित क्षेत्र न हो। टी.ए.सी. में बीस से अधिक सदस्य शामिल होते हैं, जिनमें से लगभग तीन-चैथाई सदस्य उस राज्य की विधानसभा में अनुसूचित जनजातियों के प्रतिनिधियों में से होते हैं। टी.ए.सी. का काम राज्य सरकार को उस राज्य में अनुसूचित जनजातियों के कल्याण और उनकी उन्नति से संबंधित मामलों के बारे में, जो उसे राज्यपाल द्वारा निर्दिष्ट किए जाएँ तथा सलाह देना है (Clause 4 of the Fifth Schedule of the Constitution)। अतः तीसरा कथन असत्य है।

पाँचवीं अनुसूची में किसी क्षेत्र को ‘अनुसूचित क्षेत्र’ घोषित करने की निम्नलिखित कसौटियाँ है:

  1. जनजातीय लोगों का बाहुल्य।
  2. क्षेत्र की सघनता और उसका यथोचित आकार।
  3. एक सक्षम प्रशासनिक हस्ती जैसे- जिला ब्लॉक अथवा तालुका।
  4. पिछड़े क्षेत्रों की तुलना में उस क्षेत्र का आर्थिक पिछड़ापन।
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अंतर्राष्ट्रीय बाल अपहरण के नागरिक पहुलओं पर हेग कन्वेंशन (Hague Convention on the Civil aspects of international child abduction) के संबंध में नीचे दिये गए कथनों पर विचार कीजिये।

  1. यह कन्वेंशन बालक संरक्षण और अंतर-देशीय दत्तक ग्रहण से संबंधित है।
  2. भारत इस कन्वेंशन का शुरुआती हस्ताक्षरकर्र्ता देश है।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2

उत्तरः (a)
व्याख्याः

अंतर्राष्ट्रीय बाल अपहरण के नागरिक पहलुओं को लेकर 1980 का हेग कन्वेंशन

  • बालक संरक्षण और अंतर-देशीय दत्तक ग्रहण बाबत सहयोग हेतु हेग दत्तक ग्रहण अभिसमय अभिप्रेरित है। यह एक अंतर्राष्ट्रीय संधि है जो उन बच्चों की त्वरित वापसी को सुनिश्चित करता है जिनका “अपहरण” कर उन्हें उस जगह पर रहने से वंचित कर दिया गया है, जहाँ वे रहने के अभ्यस्त हैं। अतः पहला कथन सत्य है।
  • इस कन्वेंशन पर अब तक 97 देश हस्ताक्षर कर चुके हैं। अमेरिका और यूरोपीय देशों के दबाव के बावजूद भारत ने अभी तक इस कन्वेंशन की पुष्टि नहीं की है। अतः दूसरा कथन असत्य है।
  • कन्वेंशन के तहत हस्ताक्षर करने वाले देशों को अभ्यस्त निवास स्थान से गैरकानूनी ढंग से निकाले गए बच्चों का पता लगाने और उनकी वापसी को सुनिश्चित करने के लिये एक केंद्रीय प्राधिकरण का निर्माण करना होगा।
  • मान लिया जाए कि किसी देश ने हेग कन्वेंशन पर हस्ताक्षर कर रखा है और इस मसले पर उस देश का अपना कानून कोई अलग राय रखता हो तो भी उसे कन्वेंशन के नियमों के तहत ही कार्य करना होगा।
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हाल ही में खोजी गईं प्रजातियों तथा उनकी खोज स्थल के संबंध में निम्नलिखित युग्मों में से कौन-सा सही सुमेलित नहीं है?

A) फेजर्वारया मेढक (Fejervarya goemchi)  –  गोवा
B) अपातानी ग्लोरी (Elcysma siroensis)  –  अरुणाचल प्रदेश
C) सोलीबैसिलस कलामी (Solibacillus kalaamii) –  केरल
D) ड्रिपेट्स कलामी (Drypetes kalamii)   –   पश्चिम बंगाल


उत्तर  (c)

व्याख्या:

  • हाल ही में वैज्ञानिकों ने पश्चिमी घाट में मेढकों की पाँच नई प्रजातियों की खोज की है जिनमें से सभी फेजर्वारया (Fejervarya ) जीनस से संबंधित हैं। फेजर्वारया गोएमची को गोवा में पाया गया है जिसके कारण इसे यह नाम दिया गया है। ये बड़े आकार के स्थलीय मेढक होते हैं तथा इनकी पहचान मात्र इनकी आकारिकी (मोर्फोलोजी)  को देखकर करना मुश्किल होता है। इसलिये इनकी पहचान के लिये भौगोलिक वितरण, आणविक प्रक्रियाओं का भी प्रयोग किया जाता है।

Fejervarya

Fejervarya goemchi

  • अरुणाचल प्रदेश के टल्ले वन्यजीव अभयारण्य में मोथ (एक प्रकार का कीट) की एक नई प्रजाति की खोज की गयी थी जिसका नाम वहाँ की अपातानी जनजाति के नाम पर रखा गया था। अपातानी ग्लोरी (Apatani Glory or Elcysma siroensis) अरुणाचल में देखा गया एल्किज्मा जीनस का पहला प्राणी है।

Apatani-Glory

Apatani Glory

  • सोलीबैसिलस कलामी (Solibacillus kalaamii)  एक नया  बैक्टीरिया है जिसकी खोज नासा के वैज्ञानिकों द्वारा इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पर की गयी है। यह बैक्टीरिया अभी तक पृथ्वी पर नहीं पाया गया है। इसका वैज्ञानिक नाम पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम के नाम पर रखा गया है। अतः विकल्प (c) सही नहीं हैरतीय वनस्पति सर्वेक्षण (Botanical Survey of India) ने पश्चिम बंगाल के जलदापाड़ा और बक्सा नेशनल पार्क में “ ड्रिपेट्स कलामी” नामक एक नई पौधे की प्रजाति की खोज की है। इसे पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम के नाम पर वैज्ञानिक नाम दिया गया है। यह पादप औषधीय गुणों से युक्त एक झाड़ी है।

Drypetes-kalamii

Drypetes kalamii

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जल पदचिन्ह के संबंध में कौन-सा/से युग्म सही सुमेलित है/हैं?

  1. किसी उत्पाद का निर्माण करने के लिये आवशयक जल की मात्रा                –   ग्रे जल पदचिन्ह
  2. व्यक्ति द्वारा उपभोग की गई वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन में प्रदूषित जल   –  ग्रीन जल पदचिन्ह

कूटः

A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2

उत्तरः (d)
व्याख्याः

जल पदचिह्न (Water Footprint) को स्वच्छ जल या मीठे जल की कुल मात्रा के रूप में संदर्भित किया जाता है जिसका उपयोग व्यक्ति या समुदाय द्वारा उत्पादित सामानों और सेवाओं के उत्पादन के लिये किया जाता है या व्यवसाय द्वारा उत्पादित किया जाता है। यह पानी उपभोग के विनियमन का एक उपाय है जो मानव के जल उपभोग की मात्रा घन मीटर / प्रति व्यक्ति / प्रति वर्ष के सन्दर्भ में बताता है।

Water-Footprint

जल पदचिह्न के प्रकार(Types of Water Footprint):
उपयोगों और स्रोतों के आधार पर जल पदचिह्न को तीन प्रकारों में वर्गीकृत किया गया है जो नीचे दिये गए हैं:

  1. ग्रीन जल पदचिह्न (Green Water Footprint):  यह उस ग्रीन वॉटर की मात्रा को संदर्भित करता है जो वैश्विक ग्रीन वाटर रिसोर्सेज जैसे कि नम भूमि, जलीय मिट्टी, खेतों आदि से सुखाया जाता है, व्यक्तिगत या सामुदाय द्वारा उपभोग की गई वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन में। यह कृषि, बागवानी और वानिकी उत्पादों के लिये विशेष रूप से प्रासंगिक है।
  2. ब्लू जल पदचिह्न (Blue Water Footprint): यह उस ताजा पानी की मात्रा को संदर्भित करता है जो वैश्विक नीले पानी के संसाधनों जैसे झीलों, नदियों, तालाबों, जलाशयों और कुओं को उत्पादित करने वाले सामानों और सेवाओं या उपभोक्ताओं द्वारा उपभोग सेवाओं में वाष्पित में होता है।
  3. ग्रे जल पदचिह्न (Grey Water Footprint):  यह उस ताजा पानी की मात्रा को संदर्भित करता है जो व्यक्ति या समुदाय द्वारा उपभोग किये गए सामानों और सेवाओं के उत्पादन करने के दौरान प्रदूषित होता है।

अतः दोनों युग्म सही सुमेलित नहीं हैं।

 

स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण

Swchha-Bharat-Mission

इसे स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के नाम से जाना जाता है, जिसका प्रमुख उद्देश्य 2 अक्तूबर, 2019 तक सभी ग्राम पंचायतों को खुले में शौच से मुक्त करना है। इस मिशन की सफलता के लिये गाँवों में व्यक्तिगत शौचालयों के निर्माण को प्रोत्साहन देने के साथ-साथ सार्वजनिक-निजी भागीदारी से क्लस्टर और सामुदायिक शौचालयों का निर्माण करना भी शामिल है।

  • गाँवों के स्कूलों में गंदगी और मैले की स्थिति को देखते हुए, इस कार्यक्रम के तहत स्कूलों में बुनियादी स्वच्छता सुविधाओं के साथ शौचालयों के निर्माण पर विशेष ज़ोर दिया जाता है।
  • सभी ग्राम पंचायतों में आंगनबाड़ी शौचालय और ठोस तथा तरल कचरे का प्रबंधन इस मिशन की प्रमुख विषय-वस्तु है।
  • नोडल एजेंसियाँ ग्राम पंचायत और घरेलू स्तर पर शौचालय के निर्माण और उपयोग की निगरानी करेंगी।
  • ग्रामीण मिशन के तहत ₹134000 करोड़ की लागत से 11.11 करोड़ शौचालयों का निर्माण किया जा रहा है।
  • व्यक्तिगत घरेलू शौचालय के प्रावधान के तहत, बीपीएल और एपीएल वर्ग के ग्रामीणों को केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा प्रत्येक शौचालय के लिये क्रमश: ₹9000 और ₹3000 का प्रोत्साहन, निर्माण और उपयोग के बाद दिया जाता है।

स्वच्छ भारत मिशन का लक्ष्य

  • स्वच्छ भारत मिशन का लक्ष्य 2 अक्तूबर, 2019 तक स्वच्छ और खुले में शौच से मुक्त भारत के लक्ष्य को हासिल करना है। इस लक्ष्य के चलते शौचालयों के निर्माण में बढ़ोतरी हुई है और इसका उपयोग करने वालों की संख्या भी बढ़ी है।
राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सुरक्षा पुरस्कार

NSCI

केंद्रीय श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय द्वारा वर्ष 2017 के लिये राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (National Safety Council’s – NSCI) सुरक्षा पुरस्कार (Safety Awards) प्रदान करने हेतु नई दिल्ली में एक समारोह का आयोजन किया गया।

  • NSCI सुरक्षा पुरस्कार व्यवसायगत सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं पर्यावरण के क्षेत्र में बेहद प्रतिष्ठित राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार हैं।
  • इन्हें संबंधित आकलन अवधियों के दौरान विनिर्माण, निर्माण एवं एमएसएमई क्षेत्र में संगठनों द्वारा प्रभावी सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली एवं उत्कृष्ट सुरक्षा एवं स्वास्थ्य प्रदर्शन करने पर प्रदान किया जाता है।
  • इन पुरस्कारों का आकलन एवं इनकी घोषणा हर वर्ष भारत सरकार के श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय द्वारा गठित एक स्वायत्तशासी सोसाइटी राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद द्वारा की जाती है।
  • उत्पादन, निर्माण व सूक्ष्म, लघु तथा मध्यम उद्योग क्षेत्र में कार्यरत संस्थानों को सर्वश्रेष्ठ सुरक्षा पुरस्कार, श्रेष्ठ सुरक्षा पुरस्कार, सुरक्षा पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
  • मज़दूरों की सुरक्षा व स्वास्थ्य संबंधी क्षेत्र में उल्लेखनीय काम करने वाले संस्थानों को राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद विभिन्न सुरक्षा पुरस्कारों द्वारा सम्मानित करती है।
ऑक्सीटोसीन

Oxytocin

  • स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने ऑक्सीटोसीन संरूपणों के उत्पादन को केवल सार्वजनिक क्षेत्र के घरेलू उपयोग तक सीमित कर दिया है। इसने ऑक्सीटोसीन एवं इसके संरूपणों के आयात को प्रतिबंधित कर दिया है।
  • ऑक्सीटोसीन दवा का गुप्त रूप से बड़े पैमाने पर उत्पादन और बिक्री की जा रही है जिससे इसका व्यापक दुरुपयोग हो रहा है जो मनुष्यों एवं पशुओं के लिये हानिकारक है।
  • ऑक्सीटोसिन एक हार्मोन है जो मस्तिष्क में अवस्थित पिट्यूटरी ग्रंथि से स्रावित होता है।
  • मनुष्य के व्यवहार पर पड़ने वाले प्रभाव के कारण आक्सीटोसिन को प्यारा हार्मोन व आनंद हार्मोन आदि नामों से भी जाना जाता है।
  • ऑक्सीटोसिन के दुरुपयोग के कारण दुधारू पशुओं में बाँझपन जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो रही हैं।
जीसैट 11

GSAT

  • इसरो ने देश के अब तक के सबसे वज़नी संचार सैटेलाइट जीसैट 11 के प्रक्षेपण को टाल दिया है। इसे आरियान 5 रॉकेट के माध्यम से फ़्रेंच गुयाना से छोड़ा जाना था। ज्ञातव्य है कि 2018 में भारत की योजना कई उपग्रहों को लॉन्च करने की है, लेकिन 29 मार्च को छोड़े गए जीसैट 6ए से प्रक्षेपण के 24 घंटे बाद ही संपर्क टूटने के बाद जीसैट 11 के प्रक्षेपण को टालने का निर्णय लिया गया है।
  • जीसैट 11 इसरो द्वारा निर्मित अब तक का सबसे भारी तथा महत्त्वाकांक्षी सैटेलाइट है।
  • इसके टाले जाने का मुख्य कारण यह है कि जीसैट 6ए सैटेलाइट में जिन उपकरणों का इस्तेमाल किया गया था ठीक वैसे ही कुछ उपकरणों को जीसैट 11 में भी स्थापित किया गया है।
  • इसलिये इसरो इस सैटेलाइट के प्रक्षेपण से पूर्व इसका दोबारा टेस्ट करना चाहता है ताकि इसमें पिछली बार की तरह इस बार भी कोई कमी न रह जाए और यह भी असफल न हो जाए।

जीसैट 11 की विशेषताएँ 

  • जीसैट 11 सैटेलाइट का वज़न 5,700 किलो. है।
  • यह एक जियोस्टेशनरी सैटेलाइट है। इसे भारत के ऊपर 36 हज़ार किलोमीटर की ऊँचाई पर स्थापित किया जाएगा।
  • भारत के पास ऐसा एक भी रॉकेट नहीं है जिससे इतने ज़्यादा वज़न के सैटेलाइट का प्रक्षेपण किया जा सके इसलिये इसे फ़्राँस के आरियान 5 रॉकेट से भेजा जाना था।
  • इसे सैटेलाइट पर आधारित इंटरनेट सर्विस मुहैया कराने के लिये बनाया गया है। यह बेहद शक्तिशाली है और संचार के नज़रिये से बहुत ही महत्त्वपूर्ण है।
  • यह अकेला सैटेलाइट कई सैटेलाइट के बराबर काम करने की क्षमता रखता है। पहली बार इसरो द्वारा इतना बड़ा और भारी भरकम सैटेलाइट को तैयार किया गया है।
  • इसकी कीमत लगभग 500 करोड़ रुपए है। इसे फ़्रेंच गुयाना से वापस लाने में भी करीबन 50 से 60 करोड़ रुपए खर्च होंगे, लेकिन यह इसलिये भी ज़रूरी है ताकि इस प्रक्षेपण के असफल होने की गुंज़ाइश न रहे।

स्रोत : द हिंदू एवं पी.आई.बी.